Saturday, 15 August 2015

हिन्दी व्याकरण


हिंदी व्याकरण हिंदी भाषा को शुद्ध रूप से लिखने और बोलने संबंधी नियमों का बोध कराने वाला शास्त्र है। यह हिंदी भाषा के अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें हिंदी के सभी स्वरूपों को चार खंडों के अंतर्गत अध्ययन किया जाता है। इसमें वर्ण विचार के अंतर्गत वर्ण और ध्वनि पर विचार किया गया है तो शब्द विचार के अंतर्गत शब्द के विविध पक्षों से संबंधित नियमों पर विचार किया गया है। वाक्य विचार के अंतर्गत वाक्य संबंधी विभिन्न स्थितियों एवं छंद विचार में साहित्यिक रचनाओं के शिल्पगत पक्षों पर विचार किया गया है।

वर्ण विचार

मुख्य लेख : वर्ण विभाग
वर्ण विचार हिंदी व्याकरण का पहला खंड है जिसमें भाषा की मूल इकाई वर्ण और ध्वनि पर विचार किया जाता है। इसके अंतर्गत हिंदी के मूल अक्षरों की परिभाषा, भेद-उपभेद, उच्चारण संयोग, वर्णमाला, आदि नियमों का वर्णन होता है।

वर्ण
हिन्दी भाषा की लिपि देवनागरी है। देवनागरी वर्णमाला में कुल ५२ वर्ण हैं, जिनमें से १६ स्वर हैं और ३६ व्यंजन।

स्वर
हिन्दी भाषा में मूल रूप से ग्यारह स्वर होते हैं। ये ग्यारह स्वर निम्नलिखित हैं।

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ आदि।
हिन्दी भाषा में ऋ को आधा स्वर (अर्धस्वर) माना जाता है, अतः इसे स्वर में शामिल किया गया है।

हिन्दी भाषा में प्रायः ॠ और ऌ का प्रयोग नहीं होता। अं और अः को भी स्वर में नहीं गिना जाता।

इसलिये हम कह सकते हैं कि हिन्दी में 11 स्वर होते हैं। यदि ऍ, ऑ नाम की विदेशी ध्वनियों को शामिल करें तो हिन्दी में 11+2=13 स्वर होते हैं, फिर भी 11 स्वर हिन्दी में मूलभूत हैं.

अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ॠ ऌ ऍ ऑ (हिन्दी में ॠ ऌ का प्रयोग प्रायः नहीं होता तथा ऍ ऑ का प्रयोग विदेशी ध्वनियों को दर्शाने के लिए होता है।)
शब्द विचार

मुख्य लेख : शब्द और उसके भेद
शब्द विचार हिंदी व्याकरण का दूसरा खंड है जिसके अंतर्गत शब्द की परिभाषा, भेद-उपभेद, संधि, विच्छेद, रूपांतरण, निर्माण आदि से संबंधित नियमों पर विचार किया जाता है।

शब्द

शब्द वर्णों या अक्षरों के सार्थक समूह को कहते हैं।

उदाहरण के लिए क, म तथा ल के मेल से 'कमल' बनता है जो एक खास किस्म के फूल का बोध कराता है। अतः 'कमल' एक शब्द है
कमल की ही तरह 'लकम' भी इन्हीं तीन अक्षरों का समूह है किंतु यह किसी अर्थ का बोध नहीं कराता है। इसलिए यह शब्द नहीं है।
व्याकरण के अनुसार शब्द दो प्रकार के होते हैं- विकारी और अविकारी या अव्यय। विकारी शब्दों को चार भागों में बाँटा गया है- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया। अविकारी शब्द या अव्यय भी चार प्रकार के होते हैं- क्रिया विशेषण, संबन्ध बोधक, संयोजक और विस्मयादि बोधक इस प्रकार सब मिलाकर निम्नलिखित 8 प्रकार के शब्द-भेद होते हैं।
राजेश रॉयल।

Thursday, 13 August 2015

education

परिज्ञान मोड्यूल से विशेष

1.हंटर कमीशन एवं वुड डिस्पैच में जन साधारण की शिक्षा पर बल दिया गया।

2.प्रारंभिक शिक्षा को अनिवार्य व् सर्वसुलभ बनाने का प्रथम प्रयास 1893 में बड़ौदा नरेश सियाजीराव गायकवाड़ ने किया।

3.पूनः 1910 में गोखले ने अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल में पेश किया।

4.1950 में संविधान के अनुच्छेद 45 में निशुल्क व् अनिवार्य शिक्षा का लक्ष्य रखा गया।

5. 86 वे संसोधन द्वारा 1 अप्रैल 2010 से शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में स्वीकार किया गया।

6. शिक्षा का किसी निश्चित स्तर तक सभी लोगों के लिए अनिवार्य एवं निःशुल्क रूप से उपलब्ध होना शिक्षा का सार्वभौमीकरण कहलाता है

7. राष्टीय शिक्षा निति 1986 व् एक्शन प्लान 1992 में शिक्षा के सार्वभौमीकरण हेतु सम्पूर्ण राष्ट्र में प्राथमिक शिक्षा के स्तर में एकरूपता लाने पर बाल दिया गया

8.  1992 में डॉ जनार्दन रेड्डी की अध्यक्षता में ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड को और अधिक विस्तृत व् व्यापक स्वरूप प्रदान किया गया।

9. शिक्षा के सार्वभौमीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वर्ष 1980 में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में अनोपचारिक शिक्षा की व्यवस्था की गयी तथा 2001 में यह योजना समाप्त हो गयी।

10. राष्ट्रीय शिक्षा निति 1986 के अंतर्गत ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड योजना लागु की गयी।

11.  15 अगस्त 1995 से विद्यालयों में मद्यहंन भोजन योजना की शुरुआत हुई।

12. पहले 80 प्रतिशत उपस्तिथि वाले बच्चों को हर माह 3 kg गेहूं चावल दिए जाते थे जो 1 सितम्बर 2004 में माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बदलकर पका पकाया भोजन दिया जाने लगा।

13.  सार्वभौमः शिक्षा लक्ष्य प्राप्ति हेतु 1992 की संशोधित कार्य योजना के आधार पर ज़िला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम 1997 में शुरू किया गया।

14.  सर्व शिक्षा अभियान (2001) ""डकार"" विश्व सम्मलेन के घोषणा पत्र से प्रेरित था। यह एक केंद्र पुरोनिधानित योजना है।

15.  कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना में विशेषकर शालात्यागी ,अन्य पिछड़ा वर्ग,अनुसूचित जाति,जनजाति,व् अल्पदंख्यक समुदाय की 11 से 14 वर्ष तक की ""बालिकाओं"" के लिए आवासीय ,निशुल्क शिक्षा भोजन व् चिकित्सा की व्यवस्था की गयी है।

16. शिक्षा और मानव विकास एक दूसरे के पूरक हैं।

17. 6 से 14 वर्ष की आयु में नीव पड़ती है- समस्त संज्ञानात्मक विकास की।

18. सभी बच्चों को जाति,लिंग, वर्ग,समुदाय,के भेदभाव के बिना शिक्षा प्राप्त होना शिक्षा का सार्व भौमिकरण कहलाता है।

19.  ssa के अंतर्गत कक्षा 1 से 8 तक अनिवार्य एवं निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है।

20.  स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण व् निरक्षरता उन्मूलन दो प्रमुख लक्ष्य थे।

21. संविधान की धारा 45 में वर्णित है की संविधान लागू होने की तिथि से 10 वर्ष की अवधि के भीतर 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को अनिवार्य एवं निःशुल्क शिक्षा शुलभ करा दी जाये।

22.  राष्ट्रीय शिक्षा निति 1986 में लागु हुई।

23. एक्शन प्लान 1992 में क्रियान्वित हुआ।

24. उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अधिनियम की स्थापना 1972 में हुई।

25.  इसी के अंतर्गत उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद् का गठन 25 जुलाई 1972 को हुआ।

26.  मध्याह्न भोजन वितरण 2007 से जूनियर विद्यालयों में लागु हएब

27. DPEP डिस्ट्रिक्ट प्राइमरी एजुकेशन प्रोग्राम 1992 की संशोधित कार्य योजना के आधार पर 1997 में शुरू हुआ।

28.  DPEP का कार्य GER अर्थान् नामांकन बढ़ाना तथा नए विद्यालयों की स्थापना करना है।
सर्व शिक्षा अभियान (2001) का उद्देश्य 2003 तक सभी बच्चों का नामांकन,2007 तक 5वीं पास, 2010 तक 8वीं पास तथा 2010 तक शिक्षा में जाती व् लिंग भेद समाप्त करना था।

29. कस्तूरबा गांधी विद्यालय योजना शैक्षिक रूप से पिछड़े क्षेत्र, ग्रामीण महिला साक्षरता दर औसत से कम, लैंगिक अंतराल औषत से ज्यादा वाले क्षेत्रों में चलाई जाती है।

30. KGSP की मोनिटरिंग डाइट प्राचार्य की अध्यक्षता में की जाती है।

31. शिक्षा गारंटी योजना EGS
वैकल्पिक नवाचार शिक्षा AIE
ये दोनों सर्व शिक्षा अभियान के महत्वपूर्ण भाग हैं तथा स्कूल न जाने वाले बच्चों को प्रा शि के दायरे में लाती हैं।

32. छात्रवृत्ति योजना आर्थिक अभाव की पूर्ति हेतु कक्षा 1 से 5 तक निर्धन सामान्य वर्ग हेतु ,अनुसूचित जाती/जनजाति हेतु तथा अल्पसंख्यक छात्राओं हेतु दी जाती है।

33. हमारे संविधान में अपेक्षित समता समानता गुणवत्ता का आदर्श शिक्षा सार्वभौमीकरण का आधार है।

34. गुणात्मक उन्नयन होना तभी माना जा सकता है जब बच्चा निर्धारित पाठ्यक्रम की दमस्त विषय सामग्री सीख जाये।

35.  शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में पारित हुआ।

36.  मोहिनी जैन बनाम कर्नाटक राज्य वे उन्नीकृष्णन बनाम भारत संघ में न्यायलय द्वारा दिए गए निर्णय से प्रभावित होकर संसद ने 86 वे संशोधन अधिनियम 2002 द्वारा अनुच्छेद 45 को विस्तृत रूप दिया और प्राथमिक शिक्षा को अनुच्छेद 21क के तहत मूल अधिकार बनाया।

37. अनुच्छेद 21क के तहत """"राज्य 6 से 14 वर्ष तक की आयु वाले सभी बच्चों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रबंध करेगा"""।

38. अनुच्छेद 45क के अनुसार ""राज्य सभी बालकों के लिए 6 वर्ष की आयु पूरी करने तक प्रारंभिक बाल्यावस्था देख रेख और शिक्षा देने के उपबंध का प्रयास करेगा"""।

39. RTE के अनुसार 8वीं तक निशुल्क शिक्षा व् अपनी उम्र के हिसाब से कक्षा में प्रवेश देने हेतु विशेष प्रशिक्षण तथा निजी विद्यालयों में पहली कक्षा में पड़ोसी बच्चों हेतु 25 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की जाती हैं।

40. प्राथमिक विद्यालयों में कम से कम 200 कार्यदिवस(800 शैक्षणिक घंटे) व् उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 220 कार्यदिवस(1000 शैक्षणिक घंटे) की पढाई अनिवार्य है।

41. संविधान के भाग 4 में वर्णित राज्य के निति निदेशक तत्ववके अंतर्गत शिक्षा के सार्वभौमीकरण की व्यवस्था की गयी है।

42.  अनुच्छेद 51क के अनुसार माता पिता का यह कर्त्तव्य है कि वे अपने बच्चों के लिए शिक्षा का अवसर प्रदान करें।

43.  1 अप्रैल 2010 से निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (जम्मू कश्मीर को छोड़कर) पुरे भारत में लागु हो गया है।

44. संविधान में लोकतंत्र,सामाजिक न्याय,धर्मनिरपेक्षता,भागीदारी,समानता आदि निहित मूल्य हैं।


45. निःशक्त व्यक्ति(सामान अवसर,अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 में लागु हुआ।


46. निशक्तता से अभिप्राय अंधता, कम दृष्टि, कुष्ट रोग , श्रवण शक्ति का ह्रास, चलन निशक्तता, मानसिक रुग्णता से है।

47. 1993 में बनी शिक्षा बिना बोझ की रिपोर्ट के आधार पर पाठ्यचर्या की समीक्षा उपरांत राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूप रेखा 2005 अस्तित्व में आई।

48. शिक्षक अपना दायित्व सही ढंग से पूर्ण कर सकें, इसके लिए जनगणना,आपदा राहत कार्य,चुनाव के अतिरिक्त उन्हें किसी गैर शैक्षणिक कार्य में नहीं लगाया जायेगा-rte 2009 के अनुसार।

49. राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद्(NCTE) की स्थापना 1995 में की गयी। इसका मुख्यालय नयी दिल्ली में है।

50. शिक्षक आचार संहिता में शिक्षक को क्या करना है,कैसे करना है,और क्या नहीं करना है का निर्देश दिया जाता है।

51. पाठ्यचर्या बालकेंद्रित शैक्षिक संकल्पना को मूर्त रूप देने का सबसे सशक्त माध्यम है।

52. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 में अस्तित्व में आई जिसमे पाठ्यचर्या निर्माण के मार्गदर्शक शिद्धान्तों का उल्लेख किया गया है।
53. ncf2005 में चार पाठ्यचर्या क्षेत्रों की तरफ ध्यान आकर्षित किया गया है। काम,कला व् पारंपरिक दस्तकारियां,स्वस्थ्य व् शारीरिक शिक्षा, व् शांति बी

54. ncf 2005 अध्याय 1 "परिप्रेक्ष्य" शिक्षा की गुणवत्ता,बच्चों को क्या और कैसे पद्य जाये की व्याख्या करता है।

55.  ncf 2005 अध्याय 2"सीखना और ज्ञान" में ज्ञान की प्रकृति और बच्चों में सीखने की क्षमता पर चर्चा की गयी है।

56. ncf 2005 अध्याय 3 "पाठ्यचर्या क्षेत्र,स्कूल की अवश्थायें और आंकलन" में पाठ्यचर्या के विभिन्न क्षेत्रों हेतु दिए गए सुझावों के सैद्धांतिक आधारों का निरूपण किया गया है।

57. ncf 2005 अध्याय  "विद्यालय एवं कक्षा का वातावरण"
में वातावरण के भौतिक एवं मनोवैज्ञानिक आयामो का परीक्षण करते हुए यह प्रस्तुत किया गया है कि बच्चों के अधिगम को विद्यालय एवं कक्षा का वातावरण किस प्रकार प्रभावित करते हैं।

58. ncf 2005 अध्याय 5 " व्यवस्थागत सुधार" में चर्चा की गयी है कि स्कूली व्यवस्था में किस प्रकार के व्यापक व्यवस्थागत सुधारों की जरुरत होगी ताकि बच्चा कक्षा के अनुभव से ज्ञान का सृजन कर सके।

59. ncf 2005 में शांति के लिए शिक्षा पर बाल दिया गया है।

60. ncf 2005 में "सपनो के भारत को धरातल पर उतारने की युक्ति" के बारे में बताया गया है।

61.  ज्ञान- सृजन व् अनुभव  का विषय है जिससे बच्चा करके सीखता है और ज्ञान निर्माण की इस प्रक्रिया को संरचनावाद कहा जाता है।

प्रथम मोड्यूल समाप्त


62. बालमनोविज्ञान बच्चों के विकास की विभिन्न अवस्थाओं का अध्ययन कर शिक्षक को यह बताता है की कब और किस अवस्था में बच्चों को क्या और कैसे सिखाएं।

63. बालमनोविज्ञान बच्चे के जन्म से किशोरावस्था तक के विकास का अध्ययन करता है।

64. बाल विकास की तीन मुख्य अवस्थाएं हैं
A.शैशवावस्था-जन्म से 5 वर्ष तक
B.बाल्यावस्था-6 से 12 वर्ष तक
C.किशोरावस्था-13 से 18 वर्ष तक।

65. शैशवावस्था में बच्चों के भावी जीवन का निर्माण होता है।

66. आत्माभिव्यक्ति का सबसे उत्तम् साधन मातृभाषा है।

67. बालक की औपचारिक या विद्यालयी शिक्षा का आरम्भ बाल्यावस्था में होता है।

68.  शैक्षिक दृष्टि से बाल्यावस्था जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था है।

69. शिशु के स्वाभाविक विकास के लिए शिक्षा देते समय व्यक्तिगत विभिन्नता पर विशेष ध्यान देना जाता है।

70. बाल्यावस्था में विकास की गति में स्पस्टता व् स्थिरता आ जाती है।

Wednesday, 12 August 2015

Hindi samas

[8/9/2015, 11:44 AM] +91 74992 31123: समास – परिभाषा व प्रकार 10 मिनट में याद करें
5 Replies
समास
परिभाषा:
‘समास’ शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है ‘छोटा-रूप’। अतः जब दो या
दो से अधिक
शब्द
(पद) अपने बीच की विभक्तियों का लोप कर
जो छोटा रूप बनाते
हैं, उसे समास,
सामासिक
शब्द या समस्त पद कहते हैं। जैसे ‘रसोई के लिए घर’ शब्दों में से
‘के लिए’ विभक्ति का लोप
करने पर नया शब्द बना ‘रसोई घर’, जो एक सामासिक शब्द है।
किसी समस्त पद या सामासिक शब्द को उसके विभिन्न पदों
एवं विभक्ति सहित पृथक् करने
की क्रिया को समास का विग्रह कहते हैं जैसे विद्यालय
विद्या के लिए आलय, माता-पिता=माता
और पिता।
प्रकार:
समास छः प्रकार के होते हैं-
1. अव्ययीभाव समास,
2. तत्पुरुष समास
3. द्वन्द्व समास 4.
बहुब्रीहि समास
5. द्विगु समास 5. कर्म धारय समास
1.
अव्ययीभाव समास:
अव्ययीभाव समास में प्रायः
(i)पहला पद प्रधान होता है।
(ii) पहला पद या पूरा पद अव्यय होता है।
(वे शब्द जो लिंग, वचन, कारक,
काल के
अनुसार नहीं बदलते, उन्हें अव्यय कहते हैं)
(iii)यदि एक शब्द की पुनरावृत्ति हो और
दोनों शब्द मिलकर अव्यय की तरह प्रयुक्त
हो, वहाँ भी अव्ययीभाव समास होता है।
(iv) संस्कृत के उपसर्ग युक्त पद भी
अव्ययीभव समास होते हैं-
यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार।
यथाशीघ्र = जितना शीघ्र हो
यथाक्रम = क्रम के अनुसार
यथाविधि = विधि के अनुसार
यथावसर = अवसर के अनुसार
यथेच्छा = इच्छा के अनुसार
प्रतिदिन = प्रत्येक दिन। दिन-दिन। हर दिन
प्रत्येक = हर एक। एक-एक। प्रति एक
प्रत्यक्ष = अक्षि के आगे
घर-घर = प्रत्येक घर। हर घर। किसी भी
घर को न छोड़कर
हाथों-हाथ = एक हाथ से दूसरे हाथ तक। हाथ ही
हाथ में
रातों-रात = रात ही रात में
बीचों-बीच = ठीक
बीच में
साफ-साफ = साफ के बाद साफ। बिल्कुल साफ
आमरण = मरने तक। मरणपर्यन्त
आसमुद्र = समुद्रपर्यन्त
भरपेट = पेट भरकर
अनुकूल = जैसा कूल है वैसा
यावज्जीवन = जीवनपर्यन्त
निर्विवाद = बिना विवाद के
दर असल = असल में
बाकायदा = कायदे के अनुसार
2.
तत्पुरुष समास:
(i)तत्पुरुष समास में दूसरा पद (पर पद)
प्रधान होता है अर्थात् विभक्ति का लिंग, वचन
दूसरे पद के अनुसार होता है।
(ii) इसका विग्रह करने पर कत्र्ता व सम्बोधन
की विभक्तियों (ने, हे, ओ,
अरे) के अतिरिक्त
किसी भी कारक की विभक्ति
प्रयुक्त होती है तथा विभक्तियों
के अनुसार ही इसके उपभेद होते
हैं।
जैसे –
(क) कर्म तत्पुरुष (को)
कृष्णार्पण = कृष्ण को अर्पण
नेत्र सुखद = नेत्रों को सुखद
वन-गमन = वन को गमन
जेब कतरा = जेब को कतरने वाला
प्राप्तोदक = उदक को प्राप्त
(ख) करण तत्पुरुष (से/के द्वारा)
ईश्वर-प्रदत्त = ईश्वर से प्रदत्त
हस्त-लिखित = हस्त (हाथ) से लिखित
तुलसीकृत = तुलसी द्वारा रचित
दयार्द्र = दया से आर्द्र
रत्न जडि़त = रत्नों से जडि़त
(ग) सम्प्रदान तत्पुरुष (के लिए)
हवन-सामग्री = हवन के लिए सामग्री
विद्यालय = विद्या के लिए आलय
गुरु-दक्षिणा = गुरु के लिए दक्षिणा
बलि-पशु = बलि के लिए पशु
(घ) अपादान तत्पुरुष (से पृथक्)
ऋण-मुक्त = ऋण से मुक्त
पदच्युत = पद से च्युत
मार्ग भ्रष्ट = मार्ग से भ्रष्ट
धर्म-विमुख = धर्म से विमुख
देश-निकाला = देश से निकाला
(च) सम्बन्ध तत्पुरुष (का, के, की)
मन्त्रि-परिषद् = मन्त्रियों की परिषद्
प्रेम-सागर = प्रेम का सागर
राजमाता = राजा की माता
अमचूर =आम का चूर्ण
रामचरित = राम का चरित
(छ) अधिकरण तत्पुरुष (में, पे, पर)
वनवास = वन में वास
जीवदया = जीवों पर दया
ध्यान-मग्न = ध्यान में मग्न
घुड़सवार = घोड़े पर सवार
घृतान्न = घी में पक्का अन्न
कवि पुंगव = कवियों में श्रेष्ठ
3. द्वन्द्व समास
(i)द्वन्द्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं।
(ii) दोनों पद प्रायः एक दूसरे के विलोम होते हैं, सदैव
नहीं।
(iii)इसका विग्रह करने पर ‘और’, अथवा ‘या’ का प्रयोग होता है।
माता-पिता = माता और पिता
दाल-रोटी = दाल और रोटी
पाप-पुण्य = पाप या पुण्य/पाप और पुण्य
अन्न-जल = अन्न और जल
जलवायु = जल और वायु
फल-फूल = फल और फूल
भला-बुरा = भला या बुरा
रुपया-पैसा = रुपया और पैसा
अपना-पराया = अपना या पराया
नील-लोहित = नीला और लोहित (लाल)
धर्माधर्म = धर्म या अधर्म
सुरासुर = सुर या असुर/सुर और असुर
शीतोष्ण = शीत या उष्ण
यशापयश = यश या अपयश
शीतातप = शीत या आतप
शस्त्रास्त्र = शस्त्र और अस्त्र
कृष्णार्जुन = कृष्ण और अर्जुन
4. बहुब्रीहि समास
(i)बहुब्रीहि समास में कोई भी पद प्रधान
नहीं होता।
(ii) इसमें प्रयुक्त पदों के सामान्य अर्थ की अपेक्षा
अन्य अर्थ
की प्रधानता रहती है।
(iii)इसका विग्रह करने पर ‘वाला, है, जो, जिसका,
जिसकी, जिसके, वह आदि
आते हैं।
गजानन = गज का आनन है जिसका वह (गणेश)
त्रिनेत्र = तीन नेत्र हैं जिसके वह (शिव)
चतुर्भुज = चार भुजाएँ हैं जिसकी वह (विष्णु)
षडानन = षट् (छः) आनन हैं जिसके वह (कार्तिकेय)
दशानन = दश आनन हैं जिसके वह (रावण)
घनश्याम = घन जैसा श्याम है जो वह (कृष्ण)
पीताम्बर = पीत अम्बर हैं जिसके वह
(विष्णु)
चन्द्रचूड़ = चन्द्र चूड़ पर है जिसके वह
गिरिधर = गिरि को धारण करने वाला है जो वह
मुरारि = मुर का अरि है जो वह
आशुतोष = आशु (शीघ्र) प्रसन्न होता है जो वह
नीललोहित = नीला है लहू जिसका वह
वज्रपाणि = वज्र है पाणि में जिसके वह
सुग्रीव = सुन्दर है ग्रीवा
जिसकी वह
मधुसूदन = मधु को मारने वाला है जो वह
आजानुबाहु = जानुओं (घुटनों) तक बाहुएँ हैं जिसकी
वह
नीलकण्ठ = नीला कण्ठ है जिसका वह
महादेव = देवताओं में महान् है जो वह
मयूरवाहन = मयूर है वाहन जिसका वह
कमलनयन = कमल के समान नयन हैं जिसके वह
कनकटा = कटे हुए कान है जिसके वह
जलज = जल में जन्मने वाला है जो वह (कमल)
वाल्मीकि = वल्मीक से उत्पन्न है जो वह
दिगम्बर = दिशाएँ ही हैं जिसका अम्बर ऐसा वह
कुशाग्रबुद्धि = कुश के अग्रभाग के समान बुद्धि है
जिसकी
वह
मन्द बुद्धि = मन्द है बुद्धि जिसकी वह
जितेन्द्रिय = जीत ली हैं इन्द्रियाँ जिसने
वह
चन्द्रमुखी = चन्द्रमा के समान मुखवाली
है जो वह
अष्टाध्यायी = अष्ट अध्यायों की पुस्तक
है जो वह
5. द्विगु समास
(i)द्विगु समास में प्रायः पूर्वपद संख्यावाचक होता है तो
कभी-कभी
परपद भी संख्यावाचक
देखा जा सकता है।
(ii) द्विगु समास में प्रयुक्त संख्या किसी समूह का बोध
कराती है
अन्य अर्थ का नहीं, जैसा
कि बहुब्रीहि समास में देखा है।
(iii)इसका विग्रह करने पर ‘समूह’ या ‘समाहार’ शब्द प्रयुक्त
होता है।
दोराहा = दो राहों का समाहार
पक्षद्वय = दो पक्षों का समूह
सम्पादक द्वय = दो सम्पादकों का समूह
त्रिभुज = तीन भुजाओं का समाहार
त्रिलोक या त्रिलोकी = तीन लोकों का समाहार
त्रिरत्न = तीन रत्नों का समूह
संकलन-त्रय = तीन का समाहार
भुवन-त्रय = तीन भुवनों का समाहार
चैमासा/चतुर्मास = चार मासों का समाहार
चतुर्भुज = चार भुजाओं का समाहार (रेखीय आकृति)
चतुर्वर्ण = चार वर्णों का समाहार
पंचामृत = पाँच अमृतों का समाहार
पं चपात्र = पाँच पात्रों का समाहार
पंचवटी = पाँच वटों का समाहार
षड्भुज = षट् (छः) भुजाओं का समाहार
सप्ताह = सप्त अहों (सात दिनों) का समाहार
सतसई = सात सौ का समाहार
सप्तशती = सप्त शतकों का समाहार
सप्तर्षि = सात ऋषियों का समूह
अष्ट-सिद्धि = आठ सिद्धियों का समाहार
नवरत्न = नौ रत्नों का समूह
नवरात्र = नौ रात्रियों का समाहार
दशक = दश का समाहार
शतक = सौ का समाहार
शताब्दी = शत (सौ) अब्दों (वर्षों) का समाहार
6. कर्मधारय समास
(i)कर्मधारय समास में एक पद विशेषण होता है तो दूसरा पद
विशेष्य।
(ii) इसमें कहीं कहीं उपमेय उपमान का
सम्बन्ध होता है तथा विग्रह
करने पर ‘रूपी’
शब्द प्रयुक्त होता है –
पुरुषोत्तम = पुरुष जो उत्तम
नीलकमल = नीला जो कमल
महापुरुष = महान् है जो पुरुष
घन-श्याम = घन जैसा श्याम
पीताम्बर = पीत है जो अम्बर
महर्षि = महान् है जो ऋषि
नराधम = अधम है जो नर
अधमरा = आधा है जो मरा
रक्ताम्बर = रक्त के रंग का (लाल) जो अम्बर
कुमति = कुत्सित जो मति
कुपुत्र = कुत्सित जो पुत्र
दुष्कर्म = दूषित है जो कर्म
चरम-सीमा = चरम है जो सीमा
लाल-मिर्च = लाल है जो मिर्च
कृष्ण-पक्ष = कृष्ण (काला) है जो पक्ष
मन्द-बुद्धि = मन्द जो बुद्धि
शुभागमन = शुभ है जो आगमन
नीलोत्पल = नीला है जो उत्पल
मृग नयन = मृग के समान नयन
चन्द्र मुख = चन्द्र जैसा मुख
राजर्षि = जो राजा भी है और ऋषि भी
नरसिंह = जो नर भी है और सिंह भी
मुख-चन्द्र = मुख रूपी चन्द्रमा
वचनामृत = वचनरूपी अमृत
भव-सागर = भव रूपी सागर
चरण-कमल = चरण रूपी कमल
क्रोधाग्नि = क्रोध रूपी अग्नि
चरणारविन्द = चरण रूपी अरविन्द
विद्या-धन = विद्यारूपी धन

Tuesday, 11 August 2015

education history

1835. मैकाले मिनट्स
1854. वुड्स डिस्पैच
1882. हंटर आयोग
1901. शिमला शिक्षा सम्मेलन
1902. रैले कमीशन
1904. विश्वविद्यालय अधिनियम
1911. गोखले विधेयक
1893 में सर्वप्रथम सियाजीराव गायकवाड़ ने अपने राज्य बड़ौदा मे अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा लागू किया।
1917 सैडलर कमीशन ने पी०जी० कोर्स चलाने का सुझाव दिया।
1929हार्टोंग कमीशन ने प्राथमिक शिक्षा में अपव्यय एवं अवरोधन की समस्या उजागर की
1937 वर्धा योजना नागपुर मुम्ब ई वर्तमान मे गांधी जी का प्लान कक्षा 1-8 तक निशुल्क शिक्षा 7-14वर्ष तक प्राथमिक एवं उच्च प्रा० शिक्षा प्राथमिक में सहशिक्षा एवं उच्च प्रा० में बालक बालिका अलग-अलग शिक्षा देने का प्लान
1937वुड एबट रिपोर्ट में तकनीकि शिक्षा भारत में देने का प्रस्ताव मगर द्वितीय विश्व युद्ध के कारण बिलम्ब रहा युद्ध समाप्ति के बाद Aicte. का गठन
1939 में नई तालीम समिति का गठन बेसिक शिक्षा हेतु अध्यक्ष जाकिर हुसेन जी रहे।
1944सार्जेन्ट कमीशन अंग्रेजी काल का अंतिम कमीशन यू डी सी के गठन का सुझाव university development commission
और पूर्व प्राथमिक शिक्षा शुरु की जाये।
फ्राबेल ने प्रथम बार पूर्व प्राथमिक शिक्षा की अवधारणा प्रस्तुत की.

Monday, 10 August 2015

education

 JITENDRA GOYAL: 1. Mid Day Meal – 15 August, 1995
2. Education For All – 1990
3. Operation Black Board – 1987-88
4. Sarva Shiksha Abhiyan – 2000-01
5. National Literacy Mission – 5 May, 1988
6. National Council of Education Research and Training
– 1
September, 1961
7. First Open University in India – Andhra Pradesh Open
University in 1982 (now renamed as Dr. B. R. Ambedkar
Open University).
8. Number of Open Universities in India – 14 (1 National
and
13 State Open Universities)
9. First Open University in World – United Kingdom (U.
K) in
1969
10. International Education Commission – 1996
11. Indra Gandhi National Open University – 15
September,
1985
12. All India Council for Technical Education –
Established
in November, 1945 first as an advisory body and later
on
in
1987 given statutory status by an Act of Parliament.
13. National Education Day – It is celebrated on 11
November every year in the memory of India’s First
Union
Minister of Education, Dr. Maulana Abul Kalam Azad
14. Central Advisory Board of Education – Established in
1920 as an advisory body of the Government but it was
abolished in 1923. In 1935, it was again revived.
15. Kothari Commission (1964-66) –The commission
started its work on October, 1964 and submitted its
report
on 29 June, 1966. The commission setup follows 12
task
forces and 7 working groups.
16. Central Institute of Educational Technology – 1984
17. District Primary Education Programme –1997
18. Educational Media Research Centre – 1983
19. Educational Research and Innovation Committee –
1974
20. National Assessment and Accreditation – 1992
21. National Adult Education Programme – 2 October,
1978
22. National Council of Teacher Education – 1973,
autonomous status 1993
23. Rehabilitation Council of India Act – 1992, amended
on
2000
24. Regional college of Education – 1984
25. Wechsler Adult Education Scale – 1955
26. Wechsler Children Education Scale – 1949
27. Right To Information – October, 2005.
28. International Literacy Day proclaimed by UNESCO –
8
September
29. Indian coastal areas experienced Tsunami disaster

2004
30. Programme of Action – 1992.
NAAC AUR DPEP WRONG H
: DPEP- 1994
NAAC- 1994

Sunday, 9 August 2015

phycology

शिक्षा मनोविज्ञान का खजाना (महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर )1. Psychology शब्द का सबसे पहले प्रयोग किया– रुडोल्फ गॉलकाय द्वारा 1590 में2. Psychology की प्रथम पुस्तक Psychologiaलिखी - रुडोल्फ गॉलकाय ने3. Psychology शब्द की उत्पत्ति हुई है – Psyche+Logos यूनानी भाषा के दो शब्दों से4. विश्व की प्रथम Psychology Lab – 1879 मेंविलियम वुंट द्वारा जर्मनी में स्थापित5. विश्व का प्रथम बुद्धि परीक्षण – 1905 मेंबिने व साइमन द्वारा* भारत का प्रथम बुद्धि परीक्षण – 1922 में सी.एच. राईस द्वारा6. आधुनिक मनोविज्ञान का जनक – विलियमजेम्स7. आधुनिक मनोविज्ञान के प्रथममनोवैज्ञानिक – डेकार्टे8. किन्डरगार्टन विधि के प्रतिपादक – फ्रोबेल9. डाल्टन विधि के प्रतिपादक – मिस हेलेनपार्कहर्स्ट10. मांटेसरी विधि के प्रतिपादक – मैडममारिया मांटेसरी11. संज्ञानात्मक आन्दोलन के जनक – अल्बर्टबांडूरा12. मनोविज्ञान के विभिन्न सिद्धांत/संप्रदाय और उनके जनक –•गेस्टाल्टवाद (1912) – कोहलर, कोफ्का,वर्दीमर व लेविन•संरचनावाद (1879)– विलियम वुंट•व्यवहारवाद (1912) – जे. बी. वाटसन•मनोविश्लेशणवाद (1900) – सिगमंड फ्रायड•विकासात्मक/संज्ञानात्मक – जीन पियाजे•संरचनात्मक अधिगम की अवधारणा – जेरोमब्रूनर•सामाजिक अधिगम सिद्धांत (1986) – अल्बर्टबांडूरा•संबंधवाद (1913) – थार्नडाईक•अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत (1904) –पावलव•क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत (1938) – स्किनर•प्रबलन/पुनर्बलन सिद्धांत (1915) – हल•अन्तर्दृष्टि/सूझ सिद्धांत (1912) - कोहलर13. व्यक्तितत्व मापन की प्रमुख प्रक्षेपीविधियाँ•प्रासंगिक अंतर्बोध परीक्षण (T.A.T.)•बाल अंतर्बोध परीक्षण (C.A.T.)•स्याही धब्बा परीक्षण (I.B.T.)•वाक्य पूर्ति परीक्षण (S.C.T.)14. व्यक्तितत्व मापन की प्रमुख अप्रक्षेपीविधियाँ•अनुसूची•प्रश्नावली•साक्षात्कार•आत्मकथा विधि•व्यक्ति इतिहास विधि•निरीक्षण•समाजमिति•शारीरिक परीक्षण•स्वप्न विश्लेषण•मानदंड मूल्यांकन विधि•स्वंतत्र साहचर्य परीक्षण (F.W.A.T.)15. बुद्धि के सिद्धांत और उनके प्रतिपादक –•एक खण्ड का /निरंकुशवादी सिद्धांत (1911) –बिने, टरमन व स्टर्न•द्वि खण्ड का सिद्धांत (1904) – स्पीयरमैन•तीन खण्ड का सिद्धांत – स्पीयरमैन•बहु खण्ड का सिद्धांत – थार्नडाईक•समूह कारक सिद्धांत – थर्स्टन व कैली=> मनोविज्ञान के जनक = विलियम जेम्स=> आधुनिक मनोविज्ञान के जनक = विलियमजेम्स=> प्रकार्यवाद साम्प्रदाय के जनक = विलियमजेम्स=> आत्म सम्प्रत्यय की अवधारणा = विलियमजेम्स=> शिक्षा मनोविज्ञान के जनक = थार्नडाइक=> प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत = थार्नडाइक=> प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत = थार्नडाइक=> संयोजनवाद का सिद्धांत = थार्नडाइक=> उद्दीपन-अनुक्रिया का सिद्धांत =थार्नडाइक=> S-R थ्योरी के जन्मदाता = थार्नडाइक=> अधिगम का बन्ध सिद्धांत = थार्नडाइक=> संबंधवाद का सिद्धांत = थार्नडाइक=> प्रशिक्षण अंतरण का सर्वसम अवयव कासिद्धांत = थार्नडाइक=> बहु खंड बुद्धि का सिद्धांत = थार्नडाइक=> बिने-साइमन बुद्धि परीक्षण के प्रतिपादक =बिने एवं साइमन=> बुद्धि परीक्षणों के जन्मदाता = बिने=> एक खंड बुद्धि का सिद्धांत = बिने=> दो खंड बुद्धि का सिद्धांत = स्पीयरमैन=> तीन खंड बुद्धि का सिद्धांत = स्पीयरमैन=> सामान्य व विशिष्ट तत्वों के सिद्धांत केप्रतिपादक = स्पीयरमैन=> बुद्धि का द्वय शक्ति का सिद्धांत =स्पीयरमैन=> त्रि-आयाम बुद्धि का सिद्धांत =गिलफोर्ड=> बुद्धि संरचना का सिद्धांत = गिलफोर्ड=> समूह खंड बुद्धि का सिद्धांत = थर्स्टन=> युग्म तुलनात्मक निर्णय विधि के प्रतिपादक= थर्स्टन=> क्रमबद्ध अंतराल विधि के प्रतिपादक =थर्स्टन=> समदृष्टि अन्तर विधि के प्रतिपादक = थर्स्टनव चेव=> न्यादर्श या प्रतिदर्श(वर्ग घटक) बुद्धि कासिद्धांत = थॉमसन=> पदानुक्रमिक(क्रमिक महत्व) बुद्धि कासिद्धांत = बर्ट एवं वर्नन=> तरल-ठोस बुद्धि का सिद्धांत = आर. बी.केटल=> प्रतिकारक (विशेषक) सिद्धांत केप्रतिपादक = आर. बी. केटल=> बुद्धि 'क' और बुद्धि 'ख' का सिद्धांत = हैब=> बुद्धि इकाई का सिद्धांत = स्टर्न एवं जॉनसन=> बुद्धि लब्धि ज्ञात करने के सुत्र के प्रतिपादक= विलियम स्टर्न=> संरचनावाद साम्प्रदाय के जनक = विलियमवुण्ट=> प्रयोगात्मक मनोविज्ञान के जनक =विलियम वुण्ट=> विकासात्मक मनोविज्ञान के प्रतिपादक =जीन पियाजे=> संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत = जीनपियाजे=> मूलप्रवृत्तियों के सिद्धांत के जन्मदाता =विलियम मैक्डूगल=> हार्मिक का सिध्दान्त = विलियम मैक्डूगल=> मनोविज्ञान को मन मस्तिष्क का विज्ञान= पोंपोलॉजी=> क्रिया प्रसूत अनुबंधन का सिध्दान्त =स्किनर=> सक्रिय अनुबंधन का सिध्दान्त = स्किनर=> अनुकूलित अनुक्रिया का सिद्धांत = इवानपेट्रोविच पावलव=> संबंध प्रत्यावर्तन का सिद्धांत = इवानपेट्रोविच पावलव=> शास्त्रीय अनुबंधन का सिद्धांत = इवानपेट्रोविच पावलव=> प्रतिस्थापक का सिद्धांत= इवान पेट्रोविच पावलव=> प्रबलन(पुनर्बलन) का सिद्धांत = सी. एल. हल=> व्यवस्थित व्यवहार का सिद्धांत = सी. एल.हल=> सबलीकरण का सिद्धांत = सी. एल. हल=> संपोषक का सिद्धांत = सी. एल. हल=> चालक / अंतर्नोद(प्रणोद) का सिद्धांत =सी. एल. हल=> अधिगम का सूक्ष्म सिद्धान्त = कोहलर=> सूझ या अन्तर्दृष्टि का सिद्धांत = कोहलर,वर्दीमर, कोफ्का=> गेस्टाल्टवाद सम्प्रदाय के जनक = कोहलर,वर्दीमर, कोफ्का=> क्षेत्रीय सिद्धांत = लेविन=> तलरूप का सिद्धांत = लेविन=> समूह गतिशीलता सम्प्रत्यय के प्रतिपादक =लेविन=> सामीप्य संबंधवाद का सिद्धांत = गुथरी=> साईन(चिह्न) का सिद्धांत = टॉलमैन=> सम्भावना सिद्धांत के प्रतिपादक = टॉलमैन=> अग्रिम संगठक प्रतिमान के प्रतिपादक =डेविड आसुबेल=> भाषायी सापेक्षता प्राक्कल्पना केप्रतिपादक = व्हार्फ=> मनोविज्ञान के व्यवहारवादी सम्प्रदाय के

Monday, 3 August 2015

psychology



1. Psychology शब्द का सबसे पहले प्रयोग किया – रुडोल्फ गॉलकाय द्वारा 1590 में
2. Psychologyकी प्रथम पुस्तक Psychologia लिखी - रुडोल्फ गॉलकाय ने
3. Psychologyशब्द की उत्पत्ति हुई है – Psyche+Logos यूनानी भाषा के दो शब्दों से
4.विश्व की प्रथम Psychology Lab – 1879 में विलियम वुंट द्वारा जर्मनी में स्थापित
5.विश्व का प्रथम बुद्धि परीक्षण – 1905 में बिने व साइमन द्वारा
*भारत का प्रथम बुद्धि परीक्षण – 1922 में सी. एच. राईस द्वारा
6.आधुनिक मनोविज्ञान का जनक – विलियम जेम्स
7.आधुनिक मनोविज्ञान के प्रथम मनोवैज्ञानिक – डेकार्टे
8.किन्डरगार्टन विधि के प्रतिपादक – फ्रोबेल
9.डाल्टन विधि के प्रतिपादक – मिस हेलेन पार्कहर्स्ट
10.मांटेसरी विधि के प्रतिपादक – मैडम मारिया मांटेसरी
11.संज्ञानात्मक आन्दोलन के जनक – अल्बर्ट बांडूरा


12. मनोविज्ञान के विभिन्न सिद्धांत/संप्रदाय और उनके जनक –
गेस्टाल्टवाद (1912) – कोहलर, कोफ्का, वर्दीमर व लेविन
संरचनावाद (1879)– विलियम वुंट
व्यवहारवाद (1912) – जे. बी. वाटसन
मनोविश्लेशणवाद (1900) – सिगमंड फ्रायड
विकासात्मक/संज्ञानात्मक – जीन पियाजे
संरचनात्मक अधिगम की अवधारणा – जेरोम ब्रूनर
सामाजिक अधिगम सिद्धांत (1986) – अल्बर्ट बांडूरा
संबंधवाद (1913) – थार्नडाईक
अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत (1904) – पावलव
क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत (1938) – स्किनर
प्रबलन/पुनर्बलन सिद्धांत (1915) – हल
अन्तर्दृष्टि/सूझ सिद्धांत (1912) - कोहलर
13.व्यक्तितत्व मापन की प्रमुख प्रक्षेपी विधियाँ
प्रासंगिक अंतर्बोध परीक्षण (T.A.T.)
बाल अंतर्बोध परीक्षण (C.A.T.)
स्याही धब्बा परीक्षण (I.B.T.)
वाक्य पूर्ति परीक्षण (S.C.T.)
14.व्यक्तितत्व मापन की प्रमुख अप्रक्षेपी विधियाँ
अनुसूची
प्रश्नावली
साक्षात्कार
आत्मकथा विधि
व्यक्ति इतिहास विधि
निरीक्षण
समाजमिति
शारीरिक परीक्षण
स्वप्न विश्लेषण
मानदंड मूल्यांकन विधि
स्वंतत्र साहचर्य परीक्षण (F.W.A.T.)
15.बुद्धि के सिद्धांत और उनके प्रतिपादक –
एक खण्ड का /निरंकुशवादी सिद्धांत (1911) – बिने, टरमन व स्टर्न
द्वि खण्ड का सिद्धांत (1904) – स्पीयरमैन
तीन खण्ड का सिद्धांत – स्पीयरमैन
बहु खण्ड का सिद्धांत – थार्नडाईक
समूह कारक सिद्धांत – थर्स्टन व कैली

16. बुद्धि लब्धि (I.Q.) ज्ञात करने का सूत्र –
बुद्धि लब्धि (I.Q.) = मानसिक आयु (M.A.)/वास्तविक आयु (C.A.)×100
17.बुद्धि लब्धि (I.Q.) ज्ञात करने के सूत्र का प्रतिपादक – विलियम स्टर्न (1912)
18.बुद्धि लब्धि (I.Q.) ज्ञात करने के सूत्र का सर्वप्रथम प्रयोग – (1916)
19.बुद्धि लब्धि (Intelligent Quotient) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग – टरमन
20.मानसिक आयु (Mental Age) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग – बिने (1908)
21.वैयक्तिक भाषात्मक बुद्धि परीक्षण/परीक्षाएँ –
बिने-साइमन बुद्धि परीक्षण – बिने & थियोडर साइमन (1905,1908,1911)
स्टेनफोर्ड-बिने स्केल – स्टेनफोर्ड वि.वि. में बिने द्वारा (1916,1937,1960)
22.वैयक्तिक क्रियात्मक बुद्धि परीक्षण/परीक्षाएँ –
पोर्टियस भूल-भूलैया परीक्षण – एस. डी. पोर्टियस (1924)
वैश्लर-वैल्यूब बुद्धि परीक्षण – डी. वैश्लवर (1944,1955)
23.सामूहिक भाषात्मक बुद्धि परीक्षण/परीक्षाएँ –
आर्मी अल्फ़ा परीक्षण – आर्थर एस. ओटिस (1917)
सेना सामान्य वर्गीकरण (A.G.C.T.) - (1945)
24.सामूहिक क्रियात्मक बुद्धि परीक्षण/परीक्षाएँ –
आर्मी बीटा परीक्षण - आर्थर एस. ओटिस (1919)
शिकागो क्रियात्मक बुद्धि परीक्षण – 6 वर्ष से वयस्कों की बुद्धि का मापन
25. ‘हिन्दुस्तानी क्रिया परीक्षण’ - (1922) सी. एच. राईस

Wednesday, 29 July 2015

State Open Universities (SOUs) - Distance Learning

Total 13

  1. Dr. B.R. Ambedkar Open University (BRAOU), Hyderabad, A.P. - (1982)
  2. Vardhman Mahaveer Open University (VMOU), Kota, Rajasthan - (1987)
  3. Nalanda Open University (NOU). Patna, Bihar - (1987)
  4. Yashwantrao Chavan Maharashtra Open University (YCMOU), Nashik, Maharashtra - (1989)
  5. Madhya Pradesh Bhoj Open University (MPBOU), Bhopal, M.P. - (1991)
  6. Dr. Babasaheb Ambedkar Open University (BAOU), Ahmedabad, Gujarat - (1994)
  7. Karnataka State Open University (KSOU), Mysore, Karnataka – (1996)
  8. Netaji Subhas Open University (NSOU), Kolkata, W.B. - (1997)
  9. U.P. Rajarshi Tandon Open University (UPRTOU), Allahabad, U.P. - (1998)
  10. Tamil Nadu Open University (TNOU), Chennai, Tamil Nadu - (2002)
  11. Pt. Sunderlal Sharma Open University (PSSOU), Bilaspur, Chhattisgarh - (2005)
  12. Uttaranchal Open University, Haldwani, (Nainitall), Uttaranchal
  13. Krishna Kanta Handique State Open University, Guwahati, Assam

Tuesday, 28 July 2015

RTE

Right to  Information 

One of the important features of Right to Education Act (RTE) was the introduction of Continuous and Comprehensive Evaluation (CCE) System. CCE is a holistic assessment system aiming to develop skills of students in all areas in order to make children stress-free.
According to the CBSE Board which introduced the CCE system in 2009, this includes all relevant aspects of personality development of a student. According to CBSE, education is meant to bring the best out of a learner.
The idea was to reduce the undue stress of competitiveness among students, parents and the educational institutions.
CCE stands for Continuous and Comprehensive Evaluation. CCE has been implemented in classes 9th and 10th all over India in schools which follow the CBSE guidelines.

This system has been initiated by Mr. Kapil Sibal, the minister of Human Resource development in India. CCE has been started to improve the quality of Education and was meant to lessen the burden of studies on Students. It was implemented in the later half of 2009 on students of the 9th class at that time.

The system preceding the CCE was the "Board Examination" system. There was one final board examination conducted throughout the country which would be marked by different teacher. This was to be given by all students of CBSE in Class 10. This earlier system has been criticized due to the lack of any real overall assessment and the complete focus being on getting marks in one final exam and not on overall quality education.
The CCE system divides the whole session into two terms. Each term comprises of one Summative Assessment(SAs) and two Formative Assessments(FAs). Formative Assessments refer to projects, small worksheets,group discussions and practical activities. SAs are simply examinations. SA examination papers are sent to each school by the CBSE.

A major difference between the earlier system and the CCE one is that answer sheets of students are not marked by teachers from other schools, but rather their own teachers. This does mean that the student does not remain anonymous but it has also been said that it is better as the teacher would be able to understand the child's work better while marking.
CCE implies that marks from CCE from Class 9 and Class 10 of the student be combined and reflected in a common mark sheet. This gives equal importance to both the classes. CCE involves Assessments throughout the year which means that students have to work hard throughout the year and not just the exams and this was an important idea behind the CCE system.

The Board examinations which CCE replaced were supposed to be optional, and thus students have been given a choice between SA-2 or Board examinations. The weightage for Exams is also greater in the CCE system as sixty per cent of the weightage is given to SAs. Thus, CCE is also similar to the earlier system in some aspects.

परिक्षण Test

Courtesy - Jitendra sir's  what app group शैक्षिक संवाद

1. प्रासंगिक अन्तर्बोध परीक्षण T.A.T - मोर्गन , हेनरी मुर्रे
2. प्रश्नावली विधि - वुडवर्थ
3. समाजमिति विधि - जेकोब ले मोरेनो
4. निरीक्षण विधि- वाटसन
5. प्रयोगात्मक विधि- विलियम वुण्ट
6. व्यक्ति इतिहास विधि- टाइडमैन
7. किंडरगार्टन विधि- फ्रोबेल
8. खेल विधि- हेनरी कोल्डवेल कुक
9. डाल्टन पद्धति - हेलन पार्कहर्स्ट
10.पर्यटन विधि- पेस्टोलॉजी
11. अनुसंधान विधि- आर्मस्ट्रांग
12. प्रायोजना विधि - विलियम हेनरी किलपैट्रिक
13. मूल्यांकन का श्रेय - जे. एम. राइस
14. समस्या समाधान विधि - सकरात व सेंट थॉमस
15. सूक्ष्म शिक्षण का विकास- डी.एेलन , एचीसन , रॉबर्ट बुश
16. इकाई उपागम - एच. सी. मॉरीसन
17. प्रादेशिक विधि- हर्बर्टसन
18. विनेटका योजना- कार्लटन वाशबर्न
19. ड्रेकाली प्रणाली - ड्रेकाली
20. ब्रेल पद्धति - लुई ब्रेल
21. प्रक्रिया विधि- कमेनियस
22. शाखीय अभिक्रमित अनुदेशन- नॉर्मन काउडर
23. रेखीय/ बाह्य अभिक्रमित अनुदेशन- बी. एफ.सकीनर

Mile Stones in Indian Education

Courtesy - Jitendra sir's  what app group शैक्षिक संवाद

1. Mid Day Meal – 15 August, 1995
2. Education For All – 1990
3. Operation Black Board – 1987-88
4. Sarva Shiksha Abhiyan – 2000-01
5. National Literacy Mission – 5 May, 1988
6. National Council of Education Research and Training – 1
September, 1961
7. First Open University in India – Andhra Pradesh Open
University in 1982 (now renamed as Dr. B. R. Ambedkar
Open University).
8. Number of Open Universities in India – 14 (1 National and
13 State Open Universities)
9. First Open University in World – United Kingdom (U. K) in
1969
10. International Education Commission – 1996
11. Indra Gandhi National Open University – 15 September,
1985
12. All India Council for Technical Education – Established
in November, 1945 first as an advisory body and later on in
1987 given statutory status by an Act of Parliament.
13. National Education Day – It is celebrated on 11
November every year in the memory of India’s First Union
Minister of Education, Dr. Maulana Abul Kalam Azad
14. Central Advisory Board of Education – Established in
1920 as an advisory body of the Government but it was
abolished in 1923. In 1935, it was again revived.
15. Kothari Commission (1964-66) –The commission
started its work on October, 1964 and submitted its report
on 29 June, 1966. The commission setup follows 12 task
forces and 7 working groups.
16. Central Institute of Educational Technology – 1984
17. District Primary Education Programme –1994
18. Educational Media Research Centre – 1983
19. Educational Research and Innovation Committee – 1974
20. National Assessment and Accreditation – 1992
21. National Adult Education Programme – 2 October, 1978
22. National Council of Teacher Education – 1973,
autonomous status 1993
23. Rehabilitation Council of India Act – 1992, amended on
2000
24. Regional college of Education – 1984
25. Wechsler Adult Education Scale – 1955
26. Wechsler Children Education Scale – 1949
27. Right To Information – October, 2005.
28. International Literacy Day proclaimed by UNESCO – 8
September
29. Indian coastal areas experienced Tsunami disaster –
2004
30. Programme of Action – 1992.

General Studies - Uttar Pradesh

Courtesy - Jitendra sir's  what app group शैक्षिक संवाद

उत्तर प्रदेश संबंधी जानकारी.....

* कुल जिले -75

* उत्तर प्रदेश का राजकीय वृक्ष -अशोक

* कुल जनसंख्या -19,98,12,341

* पुरुष जनसंख्या -10,44,80,510

* महिला जनसंख्या -9,53,31,831

* सर्वाधिक जनसंख्या वाले पांच जिले --

इलाहाबाद > मुरादाबाद > गाजियाबाद > आजमगढ़ > लखनऊ

* न्यूनतम जनसंख्या वाले पांच जिले --

महोबा < चित्रकूट < हमीरपुर < श्रावस्ती
< ललितपुर।

* भारत में जनसंख्या के आधार पर उत्तर प्रदेश का स्थान प्रथम।

* साक्षरता दर - 67.7%


* सर्वाधिक साक्षरता - गौतमबुद्ध नगर।

* न्यूनतम साक्षरता - श्रावस्ती।

* लोकसभा सीटों की संख्या - 80

* राज्यसभा सदस्यों की संख्या- 31

* विधानसभा सीटों की संख्या - 404

(403+1 एंग्लो इंडियन)

* विधान परिषद सदस्यों की संख्या - 100

* राज्य का जनघनत्व - 829

* राज्य में औसत लिंगानुपात - 912

* सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला - जौनपुर

* न्यूनतम लिंगानुपात वाला जिला - कानपुर नगर

* क्षेत्रफल 2,40,928 वर्ग किमी. (भारत के कुल
क्षेत्र. का 7.33%)


* क्षेत्रफल की दृष्टि से स्थान पांचवां

* उत्तर प्रदेश की सीमा को स्पर्श करने

वाला एकमात्र राष्ट्र - नेपाल।

* उत्तर प्रदेश की सीमा को स्पर्श करने
वाला केंद्रशासित प्रदेश - दिल्ली


* राज्य की सबसे कम सीमा को स्पर्श
करने वाला राज्य - हिमाचल प्रदेश।

* उत्तर प्रदेश की सबसे अधिक सीमा को
स्पर्श करने वाला - राज्य मध्य प्रदेश।

* सर्वाधिक प्रदेशों को स्पर्श करने वाला उत्तर प्रदेश का जिला -
सोनभद्र।

* राज्य में सर्वाधिक वन क्षेत्र वाला जिला - सोनभद्र (2,541
वर्ग किमी)।

* राज्य में न्यूनतम वन क्षेत्र वाला जिला - सन्त रविदास नगर (1
वर्ग किमी)।

>राज्य में वन्यजीव संरक्षण...

* राष्ट्रीय उद्यान 1  (दुधवा राष्ट्रीय उद्यान),
 प्राणी उद्यान 2 (कानपुर एवं लखनऊ),

टाइगर रिजर्व 1 (पीलीभीत),

वन्यजीव विहार 11, 
पक्षी विहार 13,

>राज्य में उद्योग/खनिज....
* चूना पत्थर भंडार में देश में यूपी का स्थान- दूसरा।

* कुल खनिज उत्पादन में यूपी का योगदान- 2.6%

* राज्य में यूरेनियम उत्पादक जिला- ललितपुर।

* सूती वस्त्र उद्योग में स्थान- तीसरा

* चीनी उत्पादन की दृष्टि से देश में स्थान- दूसरा


* चूड़ियों का निर्माण केंद्र - फिरोजाबाद।

* गेहूं, जौ, गन्ना, आलू तथा मसूर के उत्पादन में राज्य का स्थान-प्रथम


* चावल उत्पादन में राज्य का स्थान- दूसरा

* सर्वाधिक महत्वपूर्ण नकदी फसल - गन्ना।

* राज्य में अफीम का सर्वाधिक उत्पादन करने वाला जिला- बाराबंकी।

* आम, अमरूद एवं आंवला के उत्पादन में देश में राज्य का  स्थान-प्रथम।।H।।

General Studies - History


Courtesy - Jitendra sir's  what app group शैक्षिक संवाद

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भारत का राष्ट्रीय ध्वज - तिरंगा
भारत का राष्ट्रीय गान - जन-गन-मन
भारत का राष्ट्रीय गीत - वन्दे मातरम्
भारत का राष्ट्रीय चिन्ह - अशोक स्तम्भ
भारत का राष्ट्रीय पंचांग - शक संवत
भारत का राष्ट्रीय वाक्य - सत्यमेव जयते
भारत की राष्ट्रीयता - भारतीयता
भारत की राष्ट्र भाषा - हिंदी
भारत की राष्ट्रीय लिपि - देव नागरी
भारत का राष्ट्रीय ध्वज गीत - हिंद देश
का प्यारा झंडा
भारत का राष्ट्रीय नारा - श्रमेव जयते
भारत की राष्ट्रीय विदेशनीति -गुट निरपेक्ष
भारत का राष्ट्रीय पुरस्कार - भारत रत्न
भारत का राष्ट्रीय सूचना पत्र - श्वेत पत्र
भारत का राष्ट्रीय वृक्ष - बरगद
भारत की राष्ट्रीय मुद्रा - रूपया
भारत की राष्ट्रीय नदी - गंगा
भारत का राष्ट्रीय पक्षी - मोर
भारत का राष्ट्रीय पशु - बाघ
भारत का राष्ट्रीय फूल - कमल
भारत का राष्ट्रीय फल - आम
भारत की राष्ट्रीय योजना - पञ्च वर्षीय योजना
भारत का राष्ट्रीय खेल - हॉकी
भारत की राष्ट्रीय मिठाई - जलेबी
भारत के राष्ट्रीय पर्व 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) और 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस)
प्लीज एक काम करे इसे शेयर जरूर करे इससे हमारे एडमिन का होसला बढ़ेभारत का संक्षिप्इतिहास

563 : गौतम बुद्ध का जन्‍म

540 : महावीर का जन्‍म

327-326 : भारत पर एलेक्‍जेंडर का हमला। इसने भारत और यूरोप के बीच एक भू-मार्ग खोल दिया

313 : जैन परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्‍त का राज्‍याभिषेक

305 : चंद्रगुप्‍त मौर्य के हाथों सेल्‍युकस की पराजय

273-232 : अशोक का शासन

261 : कलिंग की विजय

145-101 : एलारा का क्षेत्र, श्रीलंका के चोल राजा

58 : विक्रम संवत् का आरम्‍भ

78 : शक संवत् का आरम्‍भ

120 : कनिष्‍क का राज्‍याभिषेक

320 : गुप्‍त युग का आरम्‍भ, भारत का स्‍वर्णिम काल

380 : विक्रमादित्‍य का राज्‍याभिषेक

405-411 : चीनी यात्री फाहयान की यात्रा

415 : कुमार गुप्‍त-1 का राज्‍याभि‍षेक

455 : स्‍कंदगुप्‍त का राज्‍याभिषेक

606-647 : हर्षवर्धन का शासन

712 : सिंध पर पहला अरब आक्रमण836 : कन्‍नौज के भोज राजा का राज्‍याभिषेक

985 : चोल शासक राजाराज का राज्‍याभिषेक

998 : सुल्‍तान महमूद का राज्‍याभिषेक

1000 से 1499

1001 : महमूद गजनी द्वारा भारत पर पहला आक्रमण, जिसने पंजाब के शासक जयपाल को हराया था

1025 : महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर का विध्‍वंस

1191 : तराई का पहला युद्ध

1192 : तराई का दूसरा युद्ध

1206 : दिल्‍ली की गद्दी पर कुतुबुद्दीन ऐबक का राज्‍याभिषेक

1210 : कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्‍यु

1221 : भारत पर चंगेज खान का हमला (मंगोल का आक्रमण)

1236 : दिल्‍ली की गद्दी पर रजिया सुल्‍तान का राज्‍याभिषेक

1240 : रजिया सुल्‍तान की मृत्‍यु

1296 : अलाउद्दीन खिलजी का हमला

1316 : अलाउद्दीन खिलजी की मृत्‍यु

1325 : मोहम्‍मद तुगलक का राज्‍याभिषेक

1327 : तुगलकों द्वारा दिल्‍ली से दौलताबाद और फिर दक्‍कन को राजधानी बनाया जाना

1336 : दक्षिण में विजयानगर साम्राज्‍य की स्‍थापना

1351 : फिरोजशाह का राज्‍याभिषेक

1398 : तैमूरलंग द्वारा भारत पर हमला

1469 : गुरुनानक का जन्‍म

1494 : फरघाना में बाबर का राज्‍याभिषेक

1497-98 : वास्‍को-डि-गामा की भारत की पहली यात्रा (केप ऑफ गुड होप के जरिए भारत तक समुद्री रास्‍ते   की खोज)

1500 से 1799

1526 : पानीपत की पहली लड़ाई, बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया- बाबर द्वारा मुगल शासन की स्‍थापना

1527 खानवा की लड़ाई, बाबर ने राणा सांगा को हराया

1530 : बाबर की मृत्‍यु और हुमायूं का राज्‍याभिषेक

1539 : शेरशाह सूरी ने हुमायूं का
हराया और भारतीय का सम्राट बन गया

1540 : कन्‍नौज की लड़ाई

1555 : हुमायूं ने दिल्‍ली की गद्दी को फिर से हथिया लिया

1556 : पानीपत की दूसरी लड़ाई

1565 : तालीकोट की लड़ाई

1576 : हल्‍दीघाटी की लड़ाई- राणा प्रताप ने अकबर को हराया

1582 : अकबर द्वारा दीन-ए-इलाही की स्‍थापना

1597 : राणा प्रताप की मृत्‍यु

1600 : ईस्‍ट इंडिया कंपनी की स्‍थापना

1605 : अकबर की मृत्‍यु और जहाँगीर का राज्‍याभिषेक

1606 : गुरु अर्जुन देव का वध

1611 : नूरजहाँ से जहांगीर का विवाह

1616 : सर थॉमस रो ने जहाँगीर से मुलाकात की

1627 : शिवाजी का जन्‍म और जहांगीर की मृत्‍यु

1628 : शाहजहां भारत के सम्राट बने

1631 : मुमताज महल की मृत्‍यु

1634 : भारत के बंगाल में अंग्रेजों को व्‍यापार करने की अनुमति दे दी गई

1659 : औरंगजेब का राज्‍याभिषेक, शाहजहाँ को कैद कर लिया गया

1665 : औरंगजेब द्वारा शिवाजी को कैद कर लिया गया

1680 : शिवाजी की मृत्‍यु

1707 : औरंगजेब की मृत्‍यु

1708 : गुरु गोबिंद सिंह की मृत्‍यु

1739 : नादिरशाह का भारत पर हमला

1757 : प्‍लासी की लड़ाई, लॉर्ड क्‍लाइव के हाथों भारत में अंग्रेजों के राजनीतिक शासन की स्‍थापना 1761पानीपत की तीसरी लड़ाई, शाहआलम द्वितीय भारत के सम्राट बने

1764 : बक्‍सर की लड़ाई

1765 : क्‍लाइव को भारत में कंपनी का गर्वनर नियुक्‍त किया गया

1767-69 : पहला मैसूर युद्ध

1770 : बंगाल का महान अकाल

1780 : महाराजा रणजीत सिंह का जन्‍म

1780-84 : दूसरा मैसूर युद्ध

1784 : पिट्स अधिनियम

1793 : बंगाल में स्‍थायी बंदोबस्‍त

1799 : चौथा मैसूर युद्ध- टीपू सुल्‍तान की मृत्‍यु

1800 – 1900संपादित करें

1802 : बेसेन की संधि

1809 : अमृतसर की संधि

1829 : सती प्रथा को प्रतिबंधित किया गया

1830 : ब्रह्म समाज के संस्‍थापक राजाराम मोहन राय की इंग्‍लैंड की यात्रा

1833 : राजाराम मोहन राय की मृत्‍यु

1839 : महाराजा रणजीत सिंह की मृत्‍यु

1839-42 : पहला अफगान युद्ध

1845-46 : पहला अंग्रेज-सिक्‍ख युद्ध

1852 : दूसरा अंग्रेज-बर्मा युद्ध

1853 : बांबे से थाने के बीच पहली रेलवे लाइन और कलकत्‍ता में टेलीग्राफ लाइन खोली गई

1857 : स्‍वतंत्रता का पहला संग्राम (या सिपाही विद्रोह)

1861 : रबीन्‍द्रनाथ टैगोर का जन्‍म

1869 : महात्‍मा गांधी का जन्‍म

1885 : भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस की स्‍थापना

1889 : जवाहरलाल नेहरु का जन्‍म

1897 : सुभाष चंद्र बोस का जन्‍म

1900 से भारत की स्वतंत्रतता तक

1904 : तिब्‍बत की यात्रा

1905 : लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल का पहला बंटवारा

1906 : मुस्लिम लीग की स्‍थापना

1911 : दिल्‍ली दरबार- ब्रिटिश के राजा और रानी की भारत यात्रा- दिल्‍ली भारत की राजधानी बनी

1916 : पहले विश्‍व युद्ध की शुरुआत

1916 : मुस्लिम लीग और कांग्रेस द्वारा लखनऊ समझौते पर हस्‍‍ताक्षर

1918 : पहले विश्‍व युद्ध की समाप्ति

1919 : मताधिकार पर साउथबरो कमिटी, मांटेग्‍यू-चेम्‍सफोर्ड सुधार- अमृतसर में जालियाँवाला बाग हत्‍याकांड

1920 : खिलाफत आंदोलन की शुरुआत

1927 : साइमन कमीशन का बहिष्‍कार, भारत में प्रसारण की शुरुआत

1928 : लाला लाजपतराय की मृत्‍यु (शेर-ए-पंजाब)

1929 : लॉर्ड ऑर्वम समझौता, लाहौर कांग्रेस में पूर्ण स्‍वतंत्रता का प्रस्‍ताव पास

1930 : सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत- महात्‍मा गांधी द्वारा दांडी मार्च (अप्रैल 6, 1930)

1931 : गांधी-इर्विन समझौता

1935 : भारत सरकार अधिनियम पारित

1937 : प्रांतीय स्‍वायतता, कांग्रेस मंत्रियों का पदग्रहण

1941 : रबीन्‍द्रनाथ टैगोर की मृत्‍यु, भारत से सुभाष चंद्र बोस का पलायन

1942 : क्रिप्‍स मिशन के भारत आगमन पर भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत

1943-44 : नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने प्रांतीय आजाद हिंदू हुकूमत, भारतीय राष्‍ट्रीय सेना की स्‍थापना की और बंगाल में अकाल

1945 : लाल‍ किले में आईएनए का ट्रायल, शिमला समझौता और द्वितीय विश्‍व युद्ध की समाप्ति

1946 : ब्रिटिश कैबिनेट मिशन की भारत यात्रा- केंद्र में अंतरिम सरकार का गठन

1947 : भारत का विभाजन व स्वतंत्रता

आजादी के बाद का इतिहास इस प्रकार है

1947 : 15 अगस्त को देश को अंग्रेजों की गुलामी से निजात मिली।

1948 : 30 जनवरी को महात्मा गाँधी की हत्या। इसी वर्ष भारतीय हॉकी टीम ने लंदन ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीता।

1950 : 26 जनवरी को भारत गणतंत्र बना। संविधान लागू।

1951 : देश की पहली पंचवर्षीय योजना लागू।

1952 : देश में पहले आम चुनाव। कांग्रेस 489 में से 364 सीटें जीतकर सत्ता पर काबिज। हेलसिंकी ओलिंपिक में भारतीय हॉकी टीम को स्वर्णिम सफलता।

1954 : भारत और चीन के बीच पंचशील समझौता।

1956 : राज्यों का पुनर्गठन।

1960 : भारत और पाकिस्तान में सिंधु जल समझौता।

1962 : अक्टूबर में चीन ने भारत पर हमला किया। नवंबर में चीन का दूसरा हमला। आजादी की फिजा में साँस ले रहे देश के युवकों के लिए पहली गंभीर चुनौती।

1963 : भारत ने पहला रॉकेट प्रक्षेपण किया।

1964 : जवाहरलाल नेहरू की मौत। लालबहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने।

1965 : कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच दूसरी जंग।

1966 : लालबहादुर शास्त्री का निधन। इंदिरा गाँधी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। ऑपरेशन फ्लड की शुरुआत।

1967 : हरित क्रांति की शुरुआत।

1969 : कांग्रेस का विभाजन। बैंकों का राष्ट्रीयकरण। पहली सुपरफास्ट रेलगाड़ी राजधानी एक्सप्रेस नई दिल्ली से हावड़ा के बीच दौड़ी। रेलवे की एक बड़ी उपलब्धि।

1971 : भारत और पाकिस्तान के बीच जंग। बांग्लादेश का उदय। पाकिस्तान की करारी हार।

1972 : भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौता।

1974 : 18 मई 1974 को पोखरन में परमाणु परीक्षण कर भारत छठी परमाणु ताकत बना।

1975 : प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की। जयप्रकाश नारायण, जॉर्ज फर्नांडीस और अटलबिहारी वाजपेयी सहित कई विपक्षी नेता गिरफ्तार। प्रेस की आजादी पर प्रतिबंध। भारत के पहले उपग्रह आर्यभट्ट का प्रक्षेपण। फिल्म शोले ने बॉक्स आफिस के सारे कीर्तिमान तोड़े।

1976 : भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता एक्सप्रेस शुरू।

1977 : कांग्रेस की हार के बाद देश में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनी। आंध्रप्रदेश में समुद्री तूफान 35 हजार की मौत।

1978 : भारत की पहली परखनली शिशु दुर्गा (कनुप्रिया अग्रवाल) का जन्म।

1979 : अनुभव के अभाव में पहली गैर कांग्रेसी सरकार का पतन। वंचितों और पीड़ितों की मदद के लिए मदर टेरेसा को नोबेल पुरस्कार।

1980 : विमान दुर्घटना में संजय गाँधी की अप्रत्याशित मौत। राजीव गाँधी का भारतीय राजनीति में पदार्पण। प्रकाश पादुकोण ने भारत के लिए पहली बार आल इंग्लैंड ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट जीता। मास्को ओलिंपिक में भारत को हॉकी का स्वर्ण।

1981 : टोमोरिल का संश्लेषण कर भारतीय चिकित्सा विज्ञानियों ने बड़ी सफलता हासिल की।

1982 : भारत ने नवें एशियाई खेलों का सफल आयोजन किया। देश में रंगीन टेलीविजन की शुरुआत।

1983 : भारतीय क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार विश्वकप जीता। भारत का अपना पहला बहुउद्देश्यीय संचार और मौसम उपग्रह इन्सेट-1बी प्रक्षेपित। मारुति-800 सड़कों पर उतरी।

1984 : ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत आतंकवादियों के सफाए के लिए स्वर्ण मंदिर में सेना का प्रवेश। सिख अंगरक्षक के हाथों प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या। देश भर में सिख विरोधी दंगे। भोपाल में यूनियन कार्बाइड संयंत्र में जहरीली गैस के रिसाव से हजारों की मौत। राकेश शर्मा अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने।

1985 : दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन की स्थापना। भारतीय क्रिकेट टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर विश्व क्रिकेट श्रृंखला जीती। कनाडा के टोरंटो से मुंबई आ रहा एयर इंडिया का विमान 329 यात्रियों के साथ दुर्घटनाग्रस्त।

1986 : नई शिक्षा नीति लागू चेन्नई में एड्स का पहला मामला सामने।

1987 : बोफोर्स तोप सौदे को लेकर राजीव गाँधी दागदार। भारत के पहले ग्रैंडमास्टर विश्वनाथन आनंद विश्व जूनियर शतरंज चैंपियन।

1988 : सतह से सतह पर मार करने वाले पृथ्वी प्रक्षेपास्त का सफल परीक्षण।

1990 : मंडल आयोग की सिफारिशें लागू। देश में केबल और सैटेलाइट टेलीविजन की शुरुआत।

1991 : श्रीपेरूंबदूर में आत्मघाती हमले में राजीव गाँधी की मौत। देश में आर्थिक सुधारों की शुरुआत। देश के पहले सुपर कंप्यूटर परम का निर्माण।

1992 : अयोध्या में विवादित ढाँचा ध्वस्त। शेयर बाजार में हर्षद मेहता का हजारों करोड़ रुपए का घोटाला।

1993 : मुंबई में श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट सैकड़ों की मौत। भारत में निजी विमान सेवा का संचालन शुरू।

1994 : सुष्मिता सेन ने ब्रह्मांड सुंदरी का खिताब जीता। ऐश्वर्य राय विश्व सुंदरी बनीं। पीएसएलवी की सफल उड़ान।

1995 : देश में मोबाइल सेवा शुरू।

1997 : मदर टेरेसा का देहांत। पहली भारतीय महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला कोलंबिया से अंतरिक्ष रवाना।

1998 : भारत ने एक और परमाणु परीक्षण किया। पश्चिमी देशों की भृकुटी तनी।

1999 : भारत और पाकिस्तान के बीच शांति वार्ता की कोशिशों के बीच कारगिल में भारत और पाकिस्तान की सेना में फिर टकराव। पाकिस्तान की करारी हार। इंडियन एयरलाइंस का अगवा विमान तीन आतंकवादियों की रिहाई के बाद छोड़ा गया।

2001 : देश के लोकतंत्र के हस्ताक्षर संसद भवन पर आतंकी हमला। गुजरात में भूकंप। हजारों की मौत।

2002 : गोधरा रेलवे स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस पर हमले के बाद गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा। गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर हमला। दिल्ली मेट्रो की शुरुआत।

2003 : अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर लौट रहा कोलंबिया दुर्घटनाग्रस्त। कल्पना चावला की मौत।

2004 : सुनामी के कहर से दक्षिण भारत के राज्यों में भीषण तबाही। 35 हजार की मौत। राज्यवर्धनसिंह राठौर ने एथेंस ओलिंपिक की निशानेबाजी स्पर्धा में भारत के लिए पहला व्यक्तिगत रजत जीता।

2005 : जम्मू-कश्मीर में प्रलंयकारी भूकंप में हजारों लोगों की मौत। लाखों बेघर।

2006 : मुंबई में श्रृंखलाबद्ध बम धमाके सैकड़ों की मौत।

2007 : प्रतिभा पाटिल देश में पहली महिला राष्ट्रपति बनी। अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण परमाणु करार। 

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Sunday, 19 July 2015

General Knowledge

Courtesy - Jitendra sir from what up group शैक्षिक संवाद

1.भारत की संसद किनसे मिलकर बनती है।
- राष्ट्रपति, राज्य सभा व लोक सभा
2. राज्य सभा के सदस्यों का कार्यकाल कितना होता है।
- छह वर्ष
3. संविधान के किस अनुच्छेद में उपराष्ट्रपति निर्वाचित
होता है।
- अनुच्छेद 63
4. कैबिनेट मंत्रियों में सबसे बड़ा कार्यकाल किस का रहा है।
- जगजीवन राम (लगभग 32 वर्ष)
5. सबसे कम समय तक एक कार्यकाल में प्रधानमंत्री रहे।
- अटल बिहारी वाजपेयी (13 दिन)
6. प्रधानमंत्रीयों में सबसे बड़ा कार्यकाल किनका रहा।
- जवाहर लाल नेहरू (16 वर्ष नौ माह 13 दिन)
7. संविधान में उपराष्ट्रपति से संबंधित प्रावधान किस देश
के संविधान से लिया गया है।
- अमेरिका के संविधान से
८. राज्य सभा के सदस्यों की अधिकतम
संख्या कितनी हो सकती है।
- 250
9. लोक सभा में राष्ट्रपति द्वारा कितने सदस्य मनोनित होते
हैं।
- दो
10. राज्य सभा में राष्ट्रपति द्वारा कितने सदस्य मनोनित
किये जाते हैं।
- 12
11. मरुभूमि विकास कार्यक्रम किस वर्ष शुरू किया गया।
- 1977-78
12. जवाहर रोजगार योजना किस वर्ष शुरू की गई।
- 1989
13. राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कार्यक्रम कब शुरू हुआ।
- 2006
14. देश में पहला लौह इस्पात कारखान कहां पर स्थापित
किया गया।
- कुल्टी (पश्चिम बंगाल में 1874)
15. भारत का रूर किस पठार को कहा जाता है।
- छोटानागपुर का पठार
16. संविधान सभा की संचालन समिति का अध्यक्ष कौन
था।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद
17. कौनसी देशी रियासत थी जिसके प्रतिनिधि संविधान
सभा में सम्मलित नहीं हुए थे।
- हैदराबाद
18.नासिरूद्दीन महमूद ने बलबन को कौनसी उपाधि प्रदान
की।
- उलूंग खां
19. भारत का कौनसा शासक था जिसने बगदाद के खलीफा से
सुल्तान पद की वैधानिक स्वीकृति प्राप्त की।
- इल्तुतमिश
20. सर्वप्रथम फासिस्ट का उदय कहां पर हुआ था।
- इटली में




सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तर :
राजव्यवस्था
1. सर्वप्रथम संविधान सभा की बैठक
कब हुई?— 9 दिसम्बर,
1946 को
2. संविधान
सभा का अस्थायी अध्यक्ष किसे
नियुक्त
किया गया था?— डॉ. सच्चिदानन्द
सिन्हा को
3. प्रारूप समिति ( संविधान )
का अध्यक्ष किसे बनाया गया था?
— डॉ. भीमराव अम्बेडकर को
4. भारतीय संविधान को कब अंगीकार
किया गया?— 26 नवम्बर,
1949 को
5. भारत का संविधान भारत को किस
रूप में वर्णित करता है?—
राज्यों के संघ के रूप में
6. भारतीय संविधान के अनुसार
‘राजनीतिक शक्ति’ का आधार
क्या है?— भारत की जनता
7. भारत का संविधान भारत के लिए
किस प्रकार की सरकार
की व्यवस्था करता है?— संसदीय
8. भारतीय गणराज्य का संवैधानिक
अध्यक्ष कौन होता है?—
राष्ट्रपति
9. संविधान में वर्णित मौलिक
अधिकारों की रक्षा कौन करता है?—
सर्वोच्च न्यायालय
10. ‘मिनी कंस्टीटयूशन’ किसे
कहा जाता हैं?— 42 वें संविधान
संशोधन को
11. संविधान का रक्षक किसे
बनाया गया हैं?— उच्चतम न्यायालय
को
12. संविधान की आत्मा किसे
कहा गया है?— प्रस्तावना को
13. भाषा के आधार पर पहला कौन-
सा राज्य गठित किया गया?—
आन्ध्रप्रदेश
14. दादरा और नगर हवेली भारत में
शामिल करने से पूर्व किसके
उपनिवेश थे?— पुर्तगाल
15. विदेशी नागरिकों को भारत
की नागरिकता प्रदान करने
की आवश्यक शर्त क्या हैं?— दस
वर्ष तक भारत में निवास
16. भारत में किस राज्य के
लोंगों को दोहरी नागरिकता प्राप्त हैं?

जम्मू-कश्मीर
17. मौलिक अधिकार कितने हैं?— 6
18. संविधान में कितने मूल
कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है?—
11.
19. संघीय
कार्यपालिका की शक्ति किसमें निहित
हैं?— राष्ट्रपति
20. राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के
चुनाव संबंधी विवाद कौन
सुलझाता हैं?— सर्वोच्च न्यायालय
21. राष्ट्रपति के चुनाव में कौन भाग
लेता है?— संसद और राज्य
विधान सभाओं के सदस्य
22. भारत का सर्वोच्च सेनापति कौन
होता है?— राष्ट्रपति
23. संसद की स्वीकृति के पश्चात
राष्ट्रपति शासन कितने दिन
प्रभावी रहता हैं?— छ: माह
24. ‘सार्वजनिक धन’ का संरक्षक
किसे कहा जाता है?—
नियंत्रक-महालेखा परीक्षक को
25. किस राज्य की विधान
सभा का कार्यकाल 6 वर्ष है?—
जम्मू-
कश्मीर
26. सर्वप्रथम
पंचायती राजव्यवस्था को किस राज्य
में लागू
किया गया?— राजस्थान ( नागौर, 2
अक्टूबर, 1959 को )
27. भारत में कितने राज्य व
केन्द्रशसित प्रदेश हैं?— 29 राज्य

7 केन्द्रशासित प्रदेश
28. जनहित याचिका किस न्यायालय
में दायर की जा सकती है?—
उच्चतम न्यायालय और उच्च
न्यायालय दोनों में
29. भारत में मताधिकार के लिए
कितनी आयु सीमा निर्धारित की गई
हैं?— 18 वर्ष
30. भारतीय संघ
की राजभाषा क्या है?— हिन्दी
31. भारतीय संविधान का निर्माण
एक संविधान सभा द्वारा कितने
दिन में किया गया था?— 2 वर्ष, 11
महीने व 18 दिन में
32. विश्व का सबसे लम्बा लिखित
संविधान किस देश का है?—
भारतीय संविधान
33. संविधान में प्रथम संशोधन कब
हुआ था?— 1951 में
34. भारत का पहला आम बजट
1952 में किसने प्रस्तुत किया था?
— पी. के. सन्मूखम शेटटी
35. भारतीय संविधान में किस
अनुच्छेद को संविधान की आत्मा के
नाम से जाना जाता है?—
अनुच्छेद-32 को
36. प्रधानमंत्री का सचिवालय
किसके अधीन होता है?— गृह
मंत्रालय के
37. भारत
का मैग्ना कार्टा ( Magna
Carta ) संविधान के किस
भाग को कहा जाता है?— भाग III को
38. जब भारत स्वतंत्र हुआ, उस
समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कौन
थे और किस पार्टी की सरकार थी?—
क्लीमेण्ट एटली, लेबर पार्टी
39. संसद के तीन सत्र कौन-कौन से
होते हैं?— बजट सत्र, मानसून
सत्र,शीतकालीन सत


1. भारतीय संविधान में संसदात्मक शासन प्रणाली, एकल
नागरिकता एवं विधि निर्माण प्रक्रिया किस देश से ली गई
है।
- ब्रिटेन
2. भारतीय संविधान में नीति निर्देशक तत्व किस देश से लिए
गए हैं।
- आयरलैंड
3. भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार किस देश से लिए
गए हैं।
- अमेरिका
4. भारतीय संविधान में संशोधन की प्रक्रिया किस देश से
ली गई है।
- दक्षिण अफ्रीका
5. भारतीय संविधान में आपातकाल के प्रवत्र्तन के दौरान
राष्ट्रपति को मौलिक अधिकार संबंधी शक्तियां किस देश से
ली गई हैं।
- जर्मनी
6. पाकिस्तान के लिए पृथक संविधान
सभा की स्थापना की घोषण कब की गई।
- 26 जुलाई 1947
7. मनुष्य में गुणसूत्रों की संख्या कितनी होती है।
- 46
8. राज्यपाल पद ग्रहण करने से पूर्व किसके समक्ष शपथ
लेता है।
- उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अथवा वरष्ठितम
न्यायाधीश
9. उत्तराखंड की स्थापना कब हुई।
- 2000 ई.
10. संविधान लागू होने के समय संघ सूची में कितने विषय
शामिल थे।
- 97
11. संविधान लागू होने के समय राज्य सूची में कितने विषय
शामिल थे।
- 66
12. संविधान लागू होने के समय संघ सूची में कितने विषय
शामिल थे।
- 47
13. सिक्कों की ढलाई सर्वाधिक किसके शासन काल में हुई।
- औरंगजेब
14. रेडक्रास की स्थापना किसने की।
- हेनरी ड्यूनेंट
15. न्याय दर्शन के संस्थापक कौन थे।
-महर्षि गौतम
16. आनंद वन की स्थापना किसने की।
- बाबा आम्टे
17. स्काउटिंग की स्थापना किसने की।
- वेडन पावेल
18. शेरोन लोवेन (यूएसए) का संबंध किस शास्त्रीय नृत्य
से है।
- ओडिसी
19. राजीव गांधी का समाधी स्थल किस नाम से
जाना जाता है।
- वीर भूमि
20. महाप्रयाण घाट किसका समाधि स्थल है।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद
V
K
T
भारतीय राजव्यवस्था एवं संविधान के प्रश्न उत्तर
1. लोक सभा तथा राज्य सभा की संयुक्त बैठक कब
होती है? →
संसद का सत्र शुरू होने पर
2. किस व्यक्ति ने वर्ष 1922 में यह माँग की कि भारत के
संविधान की संरचना हेतु गोलमेज सम्मेलन बुलाना चाहिए? →
मोती लाल नेहरू
3. कांग्रेस ने किस वर्ष किसी प्रकार के बाह्य हस्तक्षेप के
बिना भारतीय जनता द्वारा संविधान के निर्माण की मांग
को लेकर
प्रस्ताव पारित किया था? → 1936
4. वर्ष 1938 में किस व्यक्ति ने व्यस्क मताधिकार के
आधार पर
संविधान सभा के गठन की मांग की? → जवाहर लाल नेहरू
5. वर्ष 1942 में किस योजना के तहत यह स्वीकार
किया गया कि भारत में एक निर्वाचित संविधान सभा का गठन
होगा,
जो युद्धोपरान्त संविधान का निर्माण करेगी? → क्रिप्स
योजना
6. राज्यसभा के लिए नामित प्रथम फ़िल्म अभिनेत्री कौन
थीं? →
नरगिस दत्त
7. संविधान संशोधन कितने प्रकार से किया जा सकता है?
→ 5
8. कैबीनेट मिशन योजना के अनुसार, संविधान सभा के कुल
कितने
सदस्य होने थे? → 389
9. संविधान सभा के लिए चुनाव कब निश्चित हुआ? →
जुलाई
1946
10. किसी क्षेत्र को ‘अनुसूचित जाति और जनजाति क्षेत्र’
घोषित
करने का अधिकार किसे है? → राष्ट्रपति
11. संविधान सभा को किसने मूर्त रूप प्रदान किया?→
जवाहरलाल
नेहरू
12. भारत में कुल कितने उच्च न्यायालय हैं? → 24
13. संविधान सभा की प्रथम बैठक कब हुई थी?→ 9
दिसम्बर,
1946
14. पुनर्गठन के फलस्वरूप वर्ष 1947 में संविधान सभा के
सदस्यों की संख्या कितनी रह गयी? → 299
15. संविधान सभा में किस देशी रियासत के प्रतिनिधि ने
भाग
नहीं लिया था? → हैदराबाद
16. भारतीय संविधान में किस अधिनियम के ढांचे
को स्वीकार
किया गया है? → भारत शासन अधिनियम 1935
17. राष्ट्रपति चुनाव संबंधी मामले किसके पास भेजे जाते हैं?

उच्चतम न्यायालय
18. प्रथम लोकसभा का अध्यक्ष कौन था? → जी. वी.
मावलंकर
19. पहली बार राष्ट्रपति शासन कब लागू किया गया? →
20
जुलाई, 1951
20. संविधान द्वारा प्रदत्त नागरिकता के सम्बन्ध में संसद
ने एक
व्यापक नागरिकता अधिनियम कब बनाया? → 1955
21. प्रधानमंत्री बनने की न्यूनतम आयु है? → 25 वर्ष
22. जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन
कब
हुआ?→ सितम्बर 1946
23. मुस्लिम लीग कब अंतरिम सरकार में शामिल हुई?→
अक्टूबर
1946
24. संविधान सभा की पहली बैठक किस दिन शुरू हुई? → 9
दिसम्बर 1946
25. संविधान सभा का पहला अधिवेशन कितनी अवधि तक
चला? →
9 दिसम्बर 1946 से 23 दिसम्बर 1946
26. देश के स्वतन्त्र होने के पश्चात संविधान
सभा की पहली बैठक
कब हुई? → 31 अक्टूबर 1947
27. संविधान सभा का अस्थायी अध्यक्ष किसे चुना गया?

सच्चिदानन्द

Wednesday, 24 June 2015

Shiksha Deeksha is on New Platform


Glad to Announce that Shiksha Deeksha has Reached to new Level, Here on 23/06/2014 is our first online Course UGC NET JRF Exam Preparation In Education. We will update this course gradually please feel free to join this course and share your experiences in the FORUM tab. All the data of this course will use in a research related to online education. 

Thanks for your contribution.

URL https://edu-test-01.appspot.com

Monday, 22 June 2015

सम्प्रेषण


➖➖➖➖➖➖➖➖➖
     जन्म लेने के बाद बच्चा जब पहली बार रोता है तो यह समाज के साथ उसका पहला सम्प्रेषण होता है।
उसके बाद प्रत्येक क्षण और आजीवन सम्प्रेषण आदि के माध्यम से परस्पर सम्प्रेषण करते हैं।इसके लिए हम अपनी समस्त ज्ञानेन्द्रियों अर्थात आंख , कान , हाथ और शरीर के समस्त अंगों का प्रयोग करते हैं।

आपने अपनी पूरी तैयारी और बडे यत्न से पढाया फिर भी बच्चे कम समझ सके।
                यह समस्या हम सभी शिक्षकों के सामने आती ह। प्रत्येक शिक्षक यही प्रयत्न करता है कि जो कुछ वह पढा रहा है बच्चा उसको अधिक से अधिक समझ ले।
पढाने के बाद हम प्रायः मान लेते हैं कि इतने अच्छे शिक्षण के बाद तो बच्चा शत-प्रतिशत समझ गया होगा , लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता।
👉 क्या हमने कभी यह जानने का प्रयास किया है कि आखिर ऐसा क्यूँ होता है ?
✳✳✳✳✳✳
सम्प्रेषण का अभिप्राय
➰➰➰➰➰➰

            यदि एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को सूचना या जानकारी दी जाती है और दूसरा व्यक्ति समझ लेता है तो यह ' सम्प्रेषण ' कहराता है।

एक तरफा सम्प्रेषण
➖➖➖➖➖➖
हम तैयारी कर के कक्षा में पढाने जाते हैं और बडे यत्न से पढाते हैं परन्तु बच्चे न कोई प्रश्न करते हैं , न कोई उत्तर देते हैं , बस चुपचाप सुनते जाते हैं। बोलने वाले को ज्ञात नहीं हो पाता कि सुनने वाले ने उनकी बात समझी या नहीं।
इसमें हमारी भूमिका मुख्य है मगर बच्चे निष्क्रिय श्रोता हैं। यह एक तरफा ' सम्प्रेषण ' कहलाता है।
✔✔✔✔✔✔✔✔
        प्रभावी सम्प्रेषण
☑☑☑☑☑☑☑☑
  मान लीजिए एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को कोई सूचना देता है तथा दूसरे व्यक्ति द्वारा सूचना ग्रहण करने का संकेत प्रेषक को किसी प्रतिक्रिया द्वारा प्राप्त हो जाय तो वह प्रभावी सम्प्रेषण होता है।
       🔴🔵🔴🔵🔴🔵
        सम्प्रेषण के तीन घटक
🔴🔵🔴🔵🔴🔵🔴🔵🔴

1⃣  प्रेषक

2⃣ संदेश

3⃣ ग्राही

🔻🔻🔻🔻🔻🔻🔻🔻🔻

         सम्प्रेषण की बाधाएं -
🔺🔺🔺🔺🔺🔺🔺🔺🔺

⚫ शिक्षक की भाषा एवं उच्चारण

⚫ श्यामपट्ट लेख एवं वर्तनी सम्बन्धी दोष

⚫ बच्चों की रूचि एवं जिज्ञासा

⚫ अध्यापक की मुखमुद्रा एवं हावभाव

⚫ बच्चों से दूरी

Sunday, 21 June 2015

पियाजे के संज्ञानात्मक विकास की संकल्पनाऐ



1. संवेदी-पेशीय अवस्था (सेंसरी मोटर स्टेज)
यह अवस्था बालक में जन्म से लेकर लगभग 2 वर्ष तक की अवधि में होती है। इस अवस्था में बालक अपनी इनिद्रयों के अनुभवों तथा उन पर पेशीय कार्य करके समझ विकसित करते हैं, (जैसे देखकर छूना, पैर मारना आदि)अत: इसे संवेदी-पेशीय अवस्था कहते हैं।
प्रारंभ में बालक प्रतिवर्ती क्रियाएँ करता है। (जैसे-चूसना) तथा धीरे-धीरे संवेदी पेशीय कार्य पैटर्न दिखाता है (जैसे चीजों को बार-बार गिराना, जिनके गिरने की आवाज उसे रोचक लगे।
इस अवस्था की सबसे बड़ी उपलबिध् बालक द्वारा वस्तु स्थायित्व ( Object Permanence ) )का संज्ञान होना है। इसके द्वारा बालक यह जान पाता है कि घटनाएँ एवं वस्तुएँ तब भी उपसिथत रहती हैं जब वे हमारे सामने (देखी, सुनी या महसूस) नहीं होती है। साथ ही बालक स्वयं व विश्व में (कि दोनों अलग अस्तित्व रखते हैं)अन्तर स्पष्ट कर पाने की स्थिति में आ जाता है।
2. प्राकसंक्रियात्मक अवस्था-
पियाजे के अनुसार दूसरी अवस्था लगभग जो 2 से 7 वर्ष तक होती है। इस अवस्था को पुन: दो भागों में बाँटा जा सकता है।
(क )प्राकसंप्रत्यात्मक (ख )अन्तर्दर्शी अवधि।


(क)प्राकसंप्रत्यात्मक अवधि-
यह अवधि लगभग 2 से 4 वर्ष तक की होती है। इस अवधि में बालक वस्तु सामने उपसिथत न होने पर भी उसकी मानसिक छवि बना लेता है। बालक बाह्य जगत की विभिन्न वस्तुओं एवं व्यकितयों की मानसिक उपस्थिति  हेतु विभिन्न संकेतों का विकास कर लेते है।
भाषा का विस्तृत प्रयोग तथा आभासी क्रियाएँ बच्चों में सांकेतिक विचारों के विकास को दिखाती हैं (जैसे लकड़ी को ट्रक समझकर चलाते हुए खेलना)। बच्चों के द्वारा की गर्इ ड्राइंग में भी उनके द्वारा प्रयोग किए गए संकेतों को देखा जा सकता है।
पियाजे ने इस अवधि की दो परिसीमाएँ भी बतार्इ है आत्मकेंद्रिता और जीववाद।

आत्म केनिद्रता से तात्पर्य स्वयं के दृषिटकोण व अन्य के दृषिटकोण में विभेद न कर पाने की सिथति है। उदाहरण के लिए- 4 वर्षीया अनिता जो घर पर है तथा उसकी माँ जो कार्य स्थल से फोन कर रही हैं, के बीच बातचीत-
माँ- अनिता, क्या घर पर है?
अनिता-(चुपचाप सिर हिलाकर हामी भरती है।)
माँ- क्या मैं भार्इ से बात कर सकती हूँ?
अनिता- (फि  से सिर हिलाकर)हामी भरती है।
यहाँ पर अनिता सिर हिलाती है क्योंकि उसे लगता है कि माँ को वह दिखार्इ और सुनार्इ पड़ रहा है। वह यह समझ पाने की सिथति में नहीं है कि माँ को उसका सिर हिलाना दिखार्इ नहीं पड़ रहा है।
जीववाद- यह भी प्राकसंक्रियात्मक चिन्तन की एक अन्य सीमा है। इसमें बालक सभी वस्तुओं को 'सजीव समझता है तथा सोचता है कि ये सभी सजीवों की भांति 'कार्य करती हैं। जैसे कहना कि उस पेड़ ने पत्ते को तोड़ दिया और पत्ता नीचे गिर गया जीववाद का उदाहरण है। बच्चा बादल, पंखा, कार आदि को 'सजीव मानता है।


(ख)अन्तर्दर्शी अवधि-
यह अवधि लगभग 4 साल से 7 साल की होती है। इस अवधि में बच्चे में प्रारंभिक तर्कशकित आ जाती है तथा इससे संबंधित विभिन्न प्रश्नों को जानना चाहता है। पियाजे ने इसे अन्तर्दर्शी अवधि इसलिए कहा है क्योंकि बच्चा इस अवधि में अपने ज्ञान व समझ के बारे में पूर्णतया जानते हैं। किन्तु वो कैसे जानते हैं और क्या जानते हैं इससे कापफी हद तक अनभिज्ञ होते हैं। अर्थात वे बहुत सी बातें जानते हैं किंतु उनमें तर्कसंगत चिन्तन नहीं होता। उदाहरण के लिए वे गणितीय घटाना व गुणा, कर पाते हैं, किन्तु कहाँ प्रयोग करना है और क्यों प्रयोग करना है इसे नहीं समझ पाते हैं।
3. मूर्त संक्रियात्मक की अवस्था-
पियाजे के सिद्धांत के अनुसार ज्ञानात्मक विकास की यह तीसरी अवस्था लगभग 7 साल से प्रारंभ होकर 12 साल तक चलती है। हालांकि इस अवस्था में बच्चों के विचारों में संक्रियात्मक क्षमता आ जाती है और अन्तर्दर्शी तर्कशकित की जगह तार्किकता ( Logical Reasoning )आ जाती है। परन्तु बालक समस्या समाधन हेतु मूर्त परिसिथतियों पर ही निर्भर करता है। उदाहरण के लिए दो ठोस वस्तुओं से संबंधित समस्या हेतु बालक आसानी से मानसिक संक्रिया कर लेता है किन्तु यदि उन वस्तुओं को न देकर उनके बारे में शाबिदक कथन दिए जाएँ तो ऐसी समस्याएँ अमूर्त होने के कारण वे इसे हल नहीं कर पाएँगें।
इस अवस्था में बच्चा किसी वस्तु की विभिन्न विशेषताओं पर एक साथ विचार कर सकता है। वे मूर्त संक्रियाँ का मानसिक रूप में व्युत्क्रम कर पाते है। बच्चे यह समझने लगते हैं कि 2 × 2 = 4 हुआ तो 4 ÷ 2 = 2 होगा। इस अवधि के बालक के समस्या-समाधन को देखने हेतु निम्न परीक्षण किया जा सकता है। जैसे पदार्थ के संरक्षण के परीक्षण में बच्चे को मिटटी के दो समान गोले दिखाए जाते हैं। उसमें से एक गोले को लम्बा व पतला आकार का बना देते हैं तत्पश्चात बच्चे से पूछा जाता है कि अब दोनों (मिटटी का मूल गोला एंव लम्बी व पतली आकृति)में से किसमेंं ज्यादा मिटटी है? 8-9 वर्षीय बच्चे आसानी से बता पाते हैं कि मिटटी की मात्राा समान हैं, जबकि प्राकसंक्रियात्मक अवधि के बच्चे लम्बे व पतले में मिटटी की मात्राा ज्यादा बताते हैं। इस समस्या का उत्तर देने में बालक को मानसिक रूप से यह सोचना होता है कि गोले से ही लम्बी व पतली आकृति बनार्इ गर्इ जिससे यदि है, पुन: गोला बनाएंगे तो वह दूसरे गोले के समान ही होगा।
इस समस्या में प्राकसंक्रियात्मक अवस्था का बच्चा केवल एक ही विशेषता, लम्बार्इ या चौड़ार्इ पर ही ध्यान रखता है जबकि मूर्त संक्रियात्मक अवस्था का बच्चा दोनों विशेषताओं पर ध्यान रखता है।
पियाजे के अनुसार, इस अवस्था में बालक तीन महत्त्वपूर्ण संप्रत्यय विकसित कर लेते हैं।

संरक्षण बालक तरल, लम्बार्इ, भार इत्यादि के संरक्षण से संबंधित समस्याओं का समाधन करते पाए जाते हैं।
संबंध् क्रमिक संबंधो सम्बन्धी समस्याओं का समाधन करते पाए जाते हैं। जैसे घटते या बढ़ते क्रम में वस्तुओं को लगाने की क्षमता।
वर्गीकरण वस्तुओं के गुण के अनुसार वर्गों या उपवर्गों मे बाँट पाने की क्षमता का विकास भी बच्चों में आ जाता है।

4. औपचारिक संक्रिया की अवस्था-
पियाजे के अनुसार यह चौथी अवस्था है जो कि लगभग 11 वर्ष से आरंभ होती है, और वयस्कावस्था तक चलती है। इस अवस्था में बालक का चिन्तन अधिक अमूर्त, अधिक क्रमबद्ध , लचीला और तार्किक हो जाता है।
औपचारिक संक्रिया अवस्था में चिन्तन की अमूर्त गुणवत्ता, मौखिक कथनों की समस्या हल करने की क्षमता में देखी जा सकती है उदाहरण के लिए यह तार्किक उत्तर। कि अगर A= B तथा B = C तो A = C, को उनके सामने कथन स्वरूप में रखा जाए तो वे आसानी से निष्कर्ष तक पहुँच जाते हैं। पियाजे के अनुसार इस अवस्था में बच्चे वैज्ञानिकों की तरह तार्किक सोच रखते हैं। वे निगमात्मक पूर्वकल्पना तर्क का प्रयोग समस्या हल में करते हैं अर्थात वे समस्या के संभावित उत्तरों का परीक्षण करके बेहतर संभावित उत्तर को निष्कर्ष के रूप में खोजते हैं।
http://www.tetsuccesskey.com/2014/09/piaget-theory-hindi.html
http://www.tetsuccesskey.com/2014/09/piaget-theory-cdp-notes.html
courtesy - Jitendra Goyal, Research Scholar, University of Lucknow

Saturday, 20 June 2015

शिक्षा मनोविज्ञान का खजाना-


(महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर )
😎


1. Psychology शब्द का सबसे पहले प्रयोग  0jकिया
– रुडोल्फ गॉलकाय द्वारा 1590 में
2. Psychology की प्रथम पुस्तक Psychologia
लिखी - रुडोल्फ गॉलकाय ने
3. Psychology शब्द की उत्पत्ति हुई है – Psyche
+Logos यूनानी भाषा के दो शब्दों से
4. विश्व की प्रथम Psychology Lab – 1879 में
विलियम वुंट द्वारा जर्मनी में स्थापित
5. विश्व का प्रथम बुद्धि परीक्षण – 1905 में
बिने व साइमन द्वारा
* भारत का प्रथम बुद्धि परीक्षण – 1922 में सी.
एच. राईस द्वारा
6. आधुनिक मनोविज्ञान का जनक – विलियम
जेम्स
7. आधुनिक मनोविज्ञान के प्रथम
मनोवैज्ञानिक – डेकार्टे
8. किन्डरगार्टन विधि के प्रतिपादक – फ्रोबेल
9. डाल्टन विधि के प्रतिपादक – मिस हेलेन
पार्कहर्स्ट
10. मांटेसरी विधि के प्रतिपादक – मैडम
मारिया मांटेसरी
11. संज्ञानात्मक आन्दोलन के जनक – अल्बर्ट
बांडूरा
12. मनोविज्ञान के विभिन्न सिद्धांत/
संप्रदाय और उनके जनक –
•गेस्टाल्टवाद (1912) – कोहलर, कोफ्का,
वर्दीमर व लेविन
•संरचनावाद (1879)– विलियम वुंट
•व्यवहारवाद (1912) – जे. बी. वाटसन
•मनोविश्लेशणवाद (1900) – सिगमंड फ्रायड
•विकासात्मक/संज्ञानात्मक – जीन पियाजे
•संरचनात्मक अधिगम की अवधारणा – जेरोम
ब्रूनर
•सामाजिक अधिगम सिद्धांत (1986) – अल्बर्ट
बांडूरा
•संबंधवाद (1913) – थार्नडाईक
•अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत (1904) –
पावलव
•क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत (1938) – स्किनर
•प्रबलन/पुनर्बलन सिद्धांत (1915) – हल
•अन्तर्दृष्टि/सूझ सिद्धांत (1912) - कोहलर
13. व्यक्तितत्व मापन की प्रमुख प्रक्षेपी
विधियाँ
•प्रासंगिक अंतर्बोध परीक्षण (T.A.T.)
•बाल अंतर्बोध परीक्षण (C.A.T.)
•स्याही धब्बा परीक्षण (I.B.T.)
•वाक्य पूर्ति परीक्षण (S.C.T.)
14. व्यक्तितत्व मापन की प्रमुख अप्रक्षेपी
विधियाँ
•अनुसूची
•प्रश्नावली
•साक्षात्कार
•आत्मकथा विधि
•व्यक्ति इतिहास विधि
•निरीक्षण
•समाजमिति
•शारीरिक परीक्षण
•स्वप्न विश्लेषण
•मानदंड मूल्यांकन विधि
•स्वंतत्र साहचर्य परीक्षण (F.W.A.T.)
15. बुद्धि के सिद्धांत और उनके प्रतिपादक –
•एक खण्ड का /निरंकुशवादी सिद्धांत (1911) –
बिने, टरमन व स्टर्न
•द्वि खण्ड का सिद्धांत (1904) – स्पीयरमैन
•तीन खण्ड का सिद्धांत – स्पीयरमैन
•बहु खण्ड का सिद्धांत – थार्नडाईक
•समूह कारक सिद्धांत – थर्स्टन व कैली
=> मनोविज्ञान के जनक = विलियम जेम्स
=> आधुनिक मनोविज्ञान के जनक = विलियम
जेम्स
=> प्रकार्यवाद साम्प्रदाय के जनक = विलियम
जेम्स
=> आत्म सम्प्रत्यय की अवधारणा = विलियम
जेम्स
=> शिक्षा मनोविज्ञान के जनक = थार्नडाइक
=> प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत = थार्नडाइक
=> प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत = थार्नडाइक
=> संयोजनवाद का सिद्धांत = थार्नडाइक
=> उद्दीपन-अनुक्रिया का सिद्धांत =
थार्नडाइक
=> S-R थ्योरी के जन्मदाता = थार्नडाइक
=> अधिगम का बन्ध सिद्धांत = थार्नडाइक
=> संबंधवाद का सिद्धांत = थार्नडाइक
=> प्रशिक्षण अंतरण का सर्वसम अवयव का
सिद्धांत = थार्नडाइक
=> बहु खंड बुद्धि का सिद्धांत = थार्नडाइक
=> बिने-साइमन बुद्धि परीक्षण के प्रतिपादक =
बिने एवं साइमन
=> बुद्धि परीक्षणों के जन्मदाता = बिने
=> एक खंड बुद्धि का सिद्धांत = बिने
=> दो खंड बुद्धि का सिद्धांत = स्पीयरमैन
=> तीन खंड बुद्धि का सिद्धांत = स्पीयरमैन
=> सामान्य व विशिष्ट तत्वों के सिद्धांत के
प्रतिपादक = स्पीयरमैन
=> बुद्धि का द्वय शक्ति का सिद्धांत =
स्पीयरमैन
=> त्रि-आयाम बुद्धि का सिद्धांत =
गिलफोर्ड
=> बुद्धि संरचना का सिद्धांत = गिलफोर्ड
=> समूह खंड बुद्धि का सिद्धांत = थर्स्टन
=> युग्म तुलनात्मक निर्णय विधि के प्रतिपादक
= थर्स्टन
=> क्रमबद्ध अंतराल विधि के प्रतिपादक =
थर्स्टन
=> समदृष्टि अन्तर विधि के प्रतिपादक = थर्स्टन
व चेव
=> न्यादर्श या प्रतिदर्श(वर्ग घटक) बुद्धि का
सिद्धांत = थॉमसन
=> पदानुक्रमिक(क्रमिक महत्व) बुद्धि का
सिद्धांत = बर्ट एवं वर्नन
=> तरल-ठोस बुद्धि का सिद्धांत = आर. बी.
केटल
=> प्रतिकारक (विशेषक) सिद्धांत के
प्रतिपादक = आर. बी. केटल
=> बुद्धि 'क' और बुद्धि 'ख' का सिद्धांत = हैब
=> बुद्धि इकाई का सिद्धांत = स्टर्न एवं जॉनसन
=> बुद्धि लब्धि ज्ञात करने के सुत्र के प्रतिपादक
= विलियम स्टर्न
=> संरचनावाद साम्प्रदाय के जनक = विलियम
वुण्ट
=> प्रयोगात्मक मनोविज्ञान के जनक =
विलियम वुण्ट
=> विकासात्मक मनोविज्ञान के प्रतिपादक =
जीन पियाजे
=> संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत = जीन
पियाजे
=> मूलप्रवृत्तियों के सिद्धांत के जन्मदाता =
विलियम मैक्डूगल
=> हार्मिक का सिध्दान्त = विलियम मैक्डूगल
=> मनोविज्ञान को मन मस्तिष्क का विज्ञान
= पोंपोलॉजी
=> क्रिया प्रसूत अनुबंधन का सिध्दान्त =
स्किनर
=> सक्रिय अनुबंधन का सिध्दान्त = स्किनर
=> अनुकूलित अनुक्रिया का सिद्धांत = इवान
पेट्रोविच पावलव
=> संबंध प्रत्यावर्तन का सिद्धांत = इवान
पेट्रोविच पावलव
=> शास्त्रीय अनुबंधन का सिद्धांत = इवान
पेट्रोविच पावलव
=> प्रतिस्थापक का सिद्धांत
= इवान पेट्रोविच पावलव
=> प्रबलन(पुनर्बलन) का सिद्धांत = सी. एल. हल
=> व्यवस्थित व्यवहार का सिद्धांत = सी. एल.
हल
=> सबलीकरण का सिद्धांत = सी. एल. हल
=> संपोषक का सिद्धांत = सी. एल. हल
=> चालक / अंतर्नोद(प्रणोद) का सिद्धांत =
सी. एल. हल
=> अधिगम का सूक्ष्म सिद्धान्त = कोहलर
=> सूझ या अन्तर्दृष्टि का सिद्धांत = कोहलर,
वर्दीमर, कोफ्का
=> गेस्टाल्टवाद सम्प्रदाय के जनक = कोहलर,
वर्दीमर, कोफ्का
=> क्षेत्रीय सिद्धांत = लेविन
=> तलरूप का सिद्धांत = लेविन
=> समूह गतिशीलता सम्प्रत्यय के प्रतिपादक =
लेविन
=> सामीप्य संबंधवाद का सिद्धांत = गुथरी
=> साईन(चिह्न) का सिद्धांत = टॉलमैन
=> सम्भावना सिद्धांत के प्रतिपादक = टॉलमैन
=> अग्रिम संगठक प्रतिमान के प्रतिपादक =
डेविड आसुबेल
=> भाषायी सापेक्षता प्राक्कल्पना के
प्रतिपादक = व्हार्फ
=> मनोविज्ञान के व्यवहारवादी सम्प्रदाय के
जनक = जोहन बी. वाटसन
=> अधिगम या व्यव्हार सिद्धांत के प्रतिपादक
= क्लार्क
=> सामाजिक अधिगम सिद्धांत के प्रतिपादक
= अल्बर्ट बाण्डूरा
=> पुनरावृत्ति का सिद्धांत = स्टेनले हॉल
=> अधिगम सोपानकी के प्रतिपादक = गेने
=> विकास के सामाजिक प्रवर्तक = एरिक्सन
=> प्रोजेक्ट प्रणाली से करके सीखना का
सिद्धांत = जान ड्यूवी
=> अधिगम मनोविज्ञान का जनक = एविग हास
=> अधिगम अवस्थाओं के प्रतिपादक = जेरोम
ब्रूनर
=> संरचनात्मक अधिगम का सिद्धांत = जेरोम
ब्रूनर
=> सामान्यीकरण का सिद्धांत = सी. एच. जड
=> शक्ति मनोविज्ञान का जनक = वॉल्फ
=> अधिगम अंतरण का मूल्यों के अभिज्ञान का
सिद्धांत = बगले
=> भाषा विकास का सिद्धांत = चोमस्की
=> माँग-पूर्ति(आवश्यकता पदानुक्रम) का
सिद्धांत = मैस्लो (मास्लो)
=> स्व-यथार्थीकरण अभिप्रेरणा का सिद्धांत
= मैस्लो (मास्लो)
=> आत्मज्ञान का सिद्धांत = मैस्लो (मास्लो)
=> उपलब्धि अभिप्रेरणा का सिद्धांत = डेविड
सी.मेक्लिएंड
=> प्रोत्साहन का सिद्धांत = बोल्स व काफमैन
=> शील गुण(विशेषक) सिद्धांत के प्रतिपादक =
आलपोर्ट
=> व्यक्तित्व मापन का माँग का सिद्धांत =
हेनरी मुरे
=> कथानक बोध परीक्षण विधि के प्रतिपादक
= मोर्गन व मुरे
=> प्रासंगिक अन्तर्बोध परीक्षण (T.A.T.)
विधि के प्रतिपादक = मोर्गन व मुरे
=> बाल -अन्तर्बोध परीक्षण (C.A.T.) विधि के
प्रतिपादक = लियोपोल्ड बैलक
=> रोर्शा स्याही ध्ब्बा परीक्षण (I.B.T.)
विधि के प्रतिपादक = हरमन रोर्शा
=> वाक्य पूर्ति परीक्षण (S.C.T.) विधि के
प्रतिपादक = पाईन व टेंडलर
=> व्यवहार परीक्षण विधि के प्रतिपादक = मे
एवं हार्टशार्न
=> किंडरगार्टन(बालोद्यान ) विधि के
प्रतिपादक = फ्रोबेल
=> खेल प्रणाली के जन्मदाता = फ्रोबेल
=> मनोविश्लेषण विधि के जन्मदाता = सिगमंड
फ्रायड
=> स्वप्न विश्लेषण विधि के प्रतिपादक =
सिगमंड फ्रायड
=> प्रोजेक्ट विधि के प्रतिपादक = विलियम
हेनरी क्लिपेट्रिक
=> मापनी भेदक विधि के प्रतिपादक = एडवर्ड्स
व क्लिपेट्रिक
=> डाल्टन विधि की प्रतिपादक = मिस हेलेन
पार्कहर्स्ट
=> मांटेसरी विधि की प्रतिपादक = मेडम
मारिया मांटेसरी
=> डेक्रोली विधि के प्रतिपादक = ओविड
डेक्रोली
=> विनेटिका(इकाई) विधि के प्रतिपादक =
कार्लटन वाशबर्न
=> ह्यूरिस्टिक विधि के प्रतिपादक = एच. ई.
आर्मस्ट्रांग
=> समाजमिति विधि के प्रतिपादक = जे. एल.
मोरेनो
=> योग निर्धारण विधि के प्रतिपादक =
लिकर्ट
=> स्केलोग्राम विधि के प्रतिपादक = गटमैन
=> विभेद शाब्दिक विधि के प्रतिपादक =
आसगुड
=> स्वतंत्र शब्द साहचर्य परीक्षण विधि के
प्रतिपादक = फ़्रांसिस गाल्टन
=> स्टेनफोर्ड- बिने स्केल परीक्षण के प्रतिपादक
= टरमन
=> पोरटियस भूल-भुलैया परीक्षण के प्रतिपादक
= एस.डी. पोरटियस
=> वेश्लर-वेल्यूब बुद्धि परीक्षण के प्रतिपादक =
डी.वेश्लवर
=> आर्मी अल्फा परीक्षण के प्रतिपादक = आर्थर
एस. ओटिस
=> आर्मी बिटा परीक्षण के प्रतिपादक = आर्थर
एस. ओटिस
=> हिन्दुस्तानी बिने क्रिया परीक्षण के
प्रतिपादक = सी.एच.राइस
=> प्राथमिक वर्गीकरण परीक्षण के प्रतिपादक
= जे. मनरो
=> बाल अपराध विज्ञान का जनक = सीजर
लोम्ब्रसो
=> वंश सुत्र के नियम के प्रतिपादक = मैंडल
=> ब्रेल लिपि के प्रतिपादक = लुई ब्रेल
=> साहचर्य सिद्धांत के प्रतिपादक = एलेक्जेंडर
बैन
=> "सीखने के लिए सीखना" सिद्धांत के
प्रतिपादक = हर्लो
=> शरीर रचना का सिद्धांत = शैल्डन
=> व्यक्तित्व मापन के जीव सिद्धांत के
प्रतिपादक = गोल्डस्टीन
शिक्षा
शिक्षा का अर्थ :-
शिक्षा शब्द संस्कृत भाषा के "शिक्ष" धातु से
बना है। जिसका अर्थ है सीखना या
सिखाना। "शिक्षा" शब्द का अंग्रेजी
समानार्थक शब्द "Education" (एजुकेशन) जो की
लेटिन भाषा के "Educatum"(एजुकेटम) शब्द से बना
है तथा "Educatum"(एजुकेटम) शब्द स्वयं लैटिन
भाषा के E (ए) तथा Duco (ड्यूको) शब्दों से
मिलकर बना है। E (ए) शब्द का अर्थ है 'अंदर से' और
Duco (ड्यूको) शब्द का अर्थ है 'आगे बढ़ना'। अतः
"Education" का शाब्दिक अर्थ 'अंदर से आगे
बढ़ना' है।
लेकिन लैटिन भाषा के "Educare"(एजुकेयर) तथा
"Educere" (एजुशियर) शब्दों को भी
"Education"(एजुकेशन) शब्द के मूल के रूप में स्वीकार
किया जाता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि
"शिक्षा" शब्द का प्रयोग व्यक्ति या बालक
की आन्तरिक शक्तियों को बाहर लाने अथवा
विकसित करने की क्रिया से लिया जाता है।
शिक्षा की परिभाषायें :-
1. फ्राॅबेल के अनुसार, “शिक्षा एक प्रक्रिया है
जिसके द्वारा एक बालक अपनी शक्तियों का
विकास करता है।”
2. स्वामी विवेकानंद के अनुसार, “मनुष्य में
अन्तर्निहित पूर्णता को अभिव्यक्त करना ही
शिक्षा है।”
3. महात्मा गांधी के अनुसार, “शिक्षा से मेरा
अभिप्राय बालक या मनुष्य के शरीर, मस्तिष्क
या आत्मा के
सर्वांगीण एवं सर्वोत्तम विकास से है।”
4. अरस्तु के अनुसार, “स्वस्थ शरीर में स्वस्थ
मस्तिष्क का निर्माण करना ही शिक्षा है।”
5. पेस्टाॅलाॅजी के अनुसार, “मानव की आंतरिक
शक्तियों का स्वभाविक व सामंजस्यपूर्ण
प्रगतिशील विकास
ही शिक्षा है।”
6. हरबर्ट स्पेन्सर के अनुसार, “शिक्षा से तात्पर्य
है अन्तर्निहित शक्तियों तथा बाह्य जगत के
मध्य समन्वय स्थापित करना है।”
मनोविज्ञान
मनोविज्ञान का अर्थ :-
मनोविज्ञान शब्द का शाब्दिक अर्थ 'मन का
विज्ञान' है। मनोविज्ञान शब्द का अंग्रेजी
समानार्थक शब्द "Psychology" (साइकोलॉजी)
है जो की यूनानी (ग्रीक) भाषा के दो शब्दों
"Psyche"(साइकी)और "Logos"(लोगस) के मिलने से
बना है। Psyche (साइकी) शब्द का अर्थ
"आत्मा" और Logos (लोगस) शब्द का अर्थ
होता है "अध्ययन"। अतः Psychology का
शाब्दिक अर्थ है - "आत्मा का अध्ययन"।
मनोविज्ञान की परिभाषायें :-
1. वाटसन के अनुसार, “ मनोविज्ञान, व्यवहार
का निश्चित या शुद्ध विज्ञान है।”
2. वुडवर्थ के अनुसार, “ मनोविज्ञान, वातावरण
के सम्पर्क में होने वाले मानव व्यवहारों का
विज्ञान है।”
3. मैक्डूगल के अनुसार, “ मनोविज्ञान, आचरण एवं
व्यवहार का यथार्थ विज्ञान है।”
4. क्रो एण्ड क्रो के अनुसार, “ मनोविज्ञान
मानव - व्यवहार और मानव सम्बन्धों का अध्ययन
है।”
5. बोरिंग के अनुसार, “ मनोविज्ञान मानव
प्रकृति का अध्ययन है।”
6. स्किनर के अनुसार, “ मनोविज्ञान, व्यवहार
और अनुभव का विज्ञान है।”
7. मन के अनुसार, “आधुनिक मनोविज्ञान का
सम्बन्ध व्यवहार की वैज्ञानिक खोज से है।”
8. गैरिसन व अन्य के अनुसार, “ मनोविज्ञान का
सम्बन्ध प्रत्यक्ष मानव - व्यवहार से है।”
9. गार्डनर मर्फी के अनुसार, “ मनोविज्ञान वह
विज्ञान है, जो जीवित व्यक्तियों का उनके
वातावरण के प्रति
अनुक्रियाओं का अध्ययन करता है।”
क्रमशः मनोविज्ञान के अर्थ में परिवर्तन :-
प्रारम्भिक अवस्था में मनोविज्ञान
दर्शनशास्त्र की एक शाखा के रूप में था लेकिन
दर्शनशास्त्र से अलग होने के बाद इसका एक
स्वतंत्र विषय के रूप में उदय हुआ। दर्शनशास्त्र से
अलग होने की प्रक्रिया में मनोविज्ञान ने अनेक
अर्थ ग्रहण किए जिन्हें हम निम्न प्रकार से समझ
सकते है :-
1. आत्मा का विज्ञान :-
16 वीं शताब्दी में मनोविज्ञान को आत्मा
का विज्ञान कहा गया। इस अर्थ के प्रबल
समर्थक प्लेटो, अरस्तु, डेकार्टे आदि दार्शनिक
मनोवैज्ञानिक थे। लेकिन आत्मा क्या है? इसकी
प्रकृति या स्वरुप क्या है? क्या इसे देखा जा
सकता है? मनोवैज्ञानिकों द्वारा इन प्रश्नों के
उत्तर देने में असमर्थता के कारण इस परिभाषा
को अस्वीकार कर दिया गया।
2. मन का विज्ञान :-
17 वीं शताब्दी में मनोविज्ञान को मन या
मस्तिष्क का विज्ञान कहा गया। इस अर्थ का
प्रबल समर्थक पाॅम्पोनाजी था। लेकिन मन या
मस्तिष्क क्या है? इसका अध्ययन किस प्रकार
किया जा सकता है? इन प्रश्नों के अर्थों को
स्पष्ट नहीं कर पाने के कारण मनोविज्ञान का
यह अर्थ भी अस्वीकार कर दिया गया।
3. चेतना का विज्ञान :-
19 वीं शताब्दी में मनोविज्ञान को चेतना का
विज्ञान कहा गया। इस अर्थ के प्रबल समर्थक
विलियम जेम्स, विलियम वुंट, वाईव्स आदि
मनोवैज्ञानिक प्रमुख थे। इन्होंने केवल चेतन मन की
ही बात की है, जबकि फ्रायड ने मनोविश्लेषण
वाद में चेतन मन के अलावा अचेतन व अर्द्ध चेतन मन
के बारे में भी बताया गया है जिस पर इन्होंनें
कोई चर्चा नहीं की। अतः मनोविज्ञान का
यह अर्थ भी अस्वीकार कर दिया गया।
4. व्यवहार का विज्ञान :-
20 वीं शताब्दी के प्रारम्भ में मनोविज्ञान को
व्यवहार के विज्ञान के रुप में स्वीकार किया
गया। और वर्तमान में मनोविज्ञान के इसी अर्थ
को सर्वमान्य अर्थ के रूप में स्वीकार किया
गया है। इस अर्थ के प्रबल समर्थक वाट्सन, वुडवर्थ,
स्किनर आदि मनोविज्ञानिकों हैं।
मनोविज्ञान के अर्थ परिवर्तन को वुडवर्थ ने
निम्न प्रकार से परिभाषित किया है :-
“सर्वप्रथम मनोविज्ञान ने अपनी आत्मा को
छोडा, फिर अपने मन को त्यागा, फिर अपनी
चेतना खोई और अब यह व्यवहार के ढंग को
अपनाऐ हुए है।”
शिक्षा मनोविज्ञान
शिक्षा मनोविज्ञान का अर्थ :-
शिक्षा मनोविज्ञान दो शब्दों के मिलने से
बना है, शिक्षा+मनोविज्ञान। जिसका
शाब्दिक अर्थ है, "शिक्षा से सम्बन्धित
मनोविज्ञान"। शिक्षा मनोविज्ञान के
अन्तर्गत मनोविज्ञान के संप्रत्ययों, सिद्धांतो
तथा विधियों का प्रयोग शैक्षणिक
परिस्थितियों को उन्नत बनाने के लिए किया
जाता है। इस प्रकार मनोविज्ञान के
सिद्धान्तों का शिक्षा के क्षेत्र में प्रयोग
करना ही शिक्षा मनोविज्ञान कहलाता है।
शिक्षा मनोविज्ञान की परिभाषायें :-
1. स्टीफन के अनुसार, “शिक्षा मनोविज्ञान
शैक्षणिक विकास का क्रमिक अध्ययन है।”
2. क्रो एण्ड क्रो के अनुसार, “शिक्षा
मनोविज्ञान, व्यक्ति के जन्म से लेकर
वृद्धावस्था तक के अनुभवों का वर्णन तथा
व्याख्या करता है।”
3. स्किनर के अनुसार, “शिक्षा मनोविज्ञान के
अन्तर्गत शिक्षा से सम्बन्धित सम्पूर्ण व्यवहार
और व्यक्तित्व आ जाता है।”
4. काॅलसनिक के अनुसार, “मनोविज्ञान के
सिद्धान्तों व परिणामों का शिक्षा के क्षेत्र
में अनुप्रयोग ही शिक्षा मनोविज्ञान
कहलाता है।”
5. साॅरे व टेलफोर्ड के अनुसार, “शिक्षा
मनोविज्ञान का मुख्य सम्बन्धu
 सीखने से है। यह
मनोविज्ञान का वह अंग है, जो शिक्षा के
मनोवैज्ञानिक पहलुओं की वैज्ञानिक खोज से
विशेष रूप से सम्बन्धित है।”

Reference http://www.teachmatters.in/2014/10/pedagogy-psychology-question-answers-in-hindi-part-1.htm