Saturday, 15 August 2015

हिन्दी व्याकरण


हिंदी व्याकरण हिंदी भाषा को शुद्ध रूप से लिखने और बोलने संबंधी नियमों का बोध कराने वाला शास्त्र है। यह हिंदी भाषा के अध्ययन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें हिंदी के सभी स्वरूपों को चार खंडों के अंतर्गत अध्ययन किया जाता है। इसमें वर्ण विचार के अंतर्गत वर्ण और ध्वनि पर विचार किया गया है तो शब्द विचार के अंतर्गत शब्द के विविध पक्षों से संबंधित नियमों पर विचार किया गया है। वाक्य विचार के अंतर्गत वाक्य संबंधी विभिन्न स्थितियों एवं छंद विचार में साहित्यिक रचनाओं के शिल्पगत पक्षों पर विचार किया गया है।

वर्ण विचार

मुख्य लेख : वर्ण विभाग
वर्ण विचार हिंदी व्याकरण का पहला खंड है जिसमें भाषा की मूल इकाई वर्ण और ध्वनि पर विचार किया जाता है। इसके अंतर्गत हिंदी के मूल अक्षरों की परिभाषा, भेद-उपभेद, उच्चारण संयोग, वर्णमाला, आदि नियमों का वर्णन होता है।

वर्ण
हिन्दी भाषा की लिपि देवनागरी है। देवनागरी वर्णमाला में कुल ५२ वर्ण हैं, जिनमें से १६ स्वर हैं और ३६ व्यंजन।

स्वर
हिन्दी भाषा में मूल रूप से ग्यारह स्वर होते हैं। ये ग्यारह स्वर निम्नलिखित हैं।

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ आदि।
हिन्दी भाषा में ऋ को आधा स्वर (अर्धस्वर) माना जाता है, अतः इसे स्वर में शामिल किया गया है।

हिन्दी भाषा में प्रायः ॠ और ऌ का प्रयोग नहीं होता। अं और अः को भी स्वर में नहीं गिना जाता।

इसलिये हम कह सकते हैं कि हिन्दी में 11 स्वर होते हैं। यदि ऍ, ऑ नाम की विदेशी ध्वनियों को शामिल करें तो हिन्दी में 11+2=13 स्वर होते हैं, फिर भी 11 स्वर हिन्दी में मूलभूत हैं.

अ आ इ ई उ ऊ ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ॠ ऌ ऍ ऑ (हिन्दी में ॠ ऌ का प्रयोग प्रायः नहीं होता तथा ऍ ऑ का प्रयोग विदेशी ध्वनियों को दर्शाने के लिए होता है।)
शब्द विचार

मुख्य लेख : शब्द और उसके भेद
शब्द विचार हिंदी व्याकरण का दूसरा खंड है जिसके अंतर्गत शब्द की परिभाषा, भेद-उपभेद, संधि, विच्छेद, रूपांतरण, निर्माण आदि से संबंधित नियमों पर विचार किया जाता है।

शब्द

शब्द वर्णों या अक्षरों के सार्थक समूह को कहते हैं।

उदाहरण के लिए क, म तथा ल के मेल से 'कमल' बनता है जो एक खास किस्म के फूल का बोध कराता है। अतः 'कमल' एक शब्द है
कमल की ही तरह 'लकम' भी इन्हीं तीन अक्षरों का समूह है किंतु यह किसी अर्थ का बोध नहीं कराता है। इसलिए यह शब्द नहीं है।
व्याकरण के अनुसार शब्द दो प्रकार के होते हैं- विकारी और अविकारी या अव्यय। विकारी शब्दों को चार भागों में बाँटा गया है- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया। अविकारी शब्द या अव्यय भी चार प्रकार के होते हैं- क्रिया विशेषण, संबन्ध बोधक, संयोजक और विस्मयादि बोधक इस प्रकार सब मिलाकर निम्नलिखित 8 प्रकार के शब्द-भेद होते हैं।
राजेश रॉयल।

Thursday, 13 August 2015

education

परिज्ञान मोड्यूल से विशेष

1.हंटर कमीशन एवं वुड डिस्पैच में जन साधारण की शिक्षा पर बल दिया गया।

2.प्रारंभिक शिक्षा को अनिवार्य व् सर्वसुलभ बनाने का प्रथम प्रयास 1893 में बड़ौदा नरेश सियाजीराव गायकवाड़ ने किया।

3.पूनः 1910 में गोखले ने अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा का प्रस्ताव केंद्रीय मंत्रिमंडल में पेश किया।

4.1950 में संविधान के अनुच्छेद 45 में निशुल्क व् अनिवार्य शिक्षा का लक्ष्य रखा गया।

5. 86 वे संसोधन द्वारा 1 अप्रैल 2010 से शिक्षा को मौलिक अधिकार के रूप में स्वीकार किया गया।

6. शिक्षा का किसी निश्चित स्तर तक सभी लोगों के लिए अनिवार्य एवं निःशुल्क रूप से उपलब्ध होना शिक्षा का सार्वभौमीकरण कहलाता है

7. राष्टीय शिक्षा निति 1986 व् एक्शन प्लान 1992 में शिक्षा के सार्वभौमीकरण हेतु सम्पूर्ण राष्ट्र में प्राथमिक शिक्षा के स्तर में एकरूपता लाने पर बाल दिया गया

8.  1992 में डॉ जनार्दन रेड्डी की अध्यक्षता में ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड को और अधिक विस्तृत व् व्यापक स्वरूप प्रदान किया गया।

9. शिक्षा के सार्वभौमीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वर्ष 1980 में वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में अनोपचारिक शिक्षा की व्यवस्था की गयी तथा 2001 में यह योजना समाप्त हो गयी।

10. राष्ट्रीय शिक्षा निति 1986 के अंतर्गत ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड योजना लागु की गयी।

11.  15 अगस्त 1995 से विद्यालयों में मद्यहंन भोजन योजना की शुरुआत हुई।

12. पहले 80 प्रतिशत उपस्तिथि वाले बच्चों को हर माह 3 kg गेहूं चावल दिए जाते थे जो 1 सितम्बर 2004 में माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बदलकर पका पकाया भोजन दिया जाने लगा।

13.  सार्वभौमः शिक्षा लक्ष्य प्राप्ति हेतु 1992 की संशोधित कार्य योजना के आधार पर ज़िला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम 1997 में शुरू किया गया।

14.  सर्व शिक्षा अभियान (2001) ""डकार"" विश्व सम्मलेन के घोषणा पत्र से प्रेरित था। यह एक केंद्र पुरोनिधानित योजना है।

15.  कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना में विशेषकर शालात्यागी ,अन्य पिछड़ा वर्ग,अनुसूचित जाति,जनजाति,व् अल्पदंख्यक समुदाय की 11 से 14 वर्ष तक की ""बालिकाओं"" के लिए आवासीय ,निशुल्क शिक्षा भोजन व् चिकित्सा की व्यवस्था की गयी है।

16. शिक्षा और मानव विकास एक दूसरे के पूरक हैं।

17. 6 से 14 वर्ष की आयु में नीव पड़ती है- समस्त संज्ञानात्मक विकास की।

18. सभी बच्चों को जाति,लिंग, वर्ग,समुदाय,के भेदभाव के बिना शिक्षा प्राप्त होना शिक्षा का सार्व भौमिकरण कहलाता है।

19.  ssa के अंतर्गत कक्षा 1 से 8 तक अनिवार्य एवं निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है।

20.  स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात प्राथमिक शिक्षा का सार्वभौमीकरण व् निरक्षरता उन्मूलन दो प्रमुख लक्ष्य थे।

21. संविधान की धारा 45 में वर्णित है की संविधान लागू होने की तिथि से 10 वर्ष की अवधि के भीतर 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को अनिवार्य एवं निःशुल्क शिक्षा शुलभ करा दी जाये।

22.  राष्ट्रीय शिक्षा निति 1986 में लागु हुई।

23. एक्शन प्लान 1992 में क्रियान्वित हुआ।

24. उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अधिनियम की स्थापना 1972 में हुई।

25.  इसी के अंतर्गत उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद् का गठन 25 जुलाई 1972 को हुआ।

26.  मध्याह्न भोजन वितरण 2007 से जूनियर विद्यालयों में लागु हएब

27. DPEP डिस्ट्रिक्ट प्राइमरी एजुकेशन प्रोग्राम 1992 की संशोधित कार्य योजना के आधार पर 1997 में शुरू हुआ।

28.  DPEP का कार्य GER अर्थान् नामांकन बढ़ाना तथा नए विद्यालयों की स्थापना करना है।
सर्व शिक्षा अभियान (2001) का उद्देश्य 2003 तक सभी बच्चों का नामांकन,2007 तक 5वीं पास, 2010 तक 8वीं पास तथा 2010 तक शिक्षा में जाती व् लिंग भेद समाप्त करना था।

29. कस्तूरबा गांधी विद्यालय योजना शैक्षिक रूप से पिछड़े क्षेत्र, ग्रामीण महिला साक्षरता दर औसत से कम, लैंगिक अंतराल औषत से ज्यादा वाले क्षेत्रों में चलाई जाती है।

30. KGSP की मोनिटरिंग डाइट प्राचार्य की अध्यक्षता में की जाती है।

31. शिक्षा गारंटी योजना EGS
वैकल्पिक नवाचार शिक्षा AIE
ये दोनों सर्व शिक्षा अभियान के महत्वपूर्ण भाग हैं तथा स्कूल न जाने वाले बच्चों को प्रा शि के दायरे में लाती हैं।

32. छात्रवृत्ति योजना आर्थिक अभाव की पूर्ति हेतु कक्षा 1 से 5 तक निर्धन सामान्य वर्ग हेतु ,अनुसूचित जाती/जनजाति हेतु तथा अल्पसंख्यक छात्राओं हेतु दी जाती है।

33. हमारे संविधान में अपेक्षित समता समानता गुणवत्ता का आदर्श शिक्षा सार्वभौमीकरण का आधार है।

34. गुणात्मक उन्नयन होना तभी माना जा सकता है जब बच्चा निर्धारित पाठ्यक्रम की दमस्त विषय सामग्री सीख जाये।

35.  शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में पारित हुआ।

36.  मोहिनी जैन बनाम कर्नाटक राज्य वे उन्नीकृष्णन बनाम भारत संघ में न्यायलय द्वारा दिए गए निर्णय से प्रभावित होकर संसद ने 86 वे संशोधन अधिनियम 2002 द्वारा अनुच्छेद 45 को विस्तृत रूप दिया और प्राथमिक शिक्षा को अनुच्छेद 21क के तहत मूल अधिकार बनाया।

37. अनुच्छेद 21क के तहत """"राज्य 6 से 14 वर्ष तक की आयु वाले सभी बच्चों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने का प्रबंध करेगा"""।

38. अनुच्छेद 45क के अनुसार ""राज्य सभी बालकों के लिए 6 वर्ष की आयु पूरी करने तक प्रारंभिक बाल्यावस्था देख रेख और शिक्षा देने के उपबंध का प्रयास करेगा"""।

39. RTE के अनुसार 8वीं तक निशुल्क शिक्षा व् अपनी उम्र के हिसाब से कक्षा में प्रवेश देने हेतु विशेष प्रशिक्षण तथा निजी विद्यालयों में पहली कक्षा में पड़ोसी बच्चों हेतु 25 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की जाती हैं।

40. प्राथमिक विद्यालयों में कम से कम 200 कार्यदिवस(800 शैक्षणिक घंटे) व् उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 220 कार्यदिवस(1000 शैक्षणिक घंटे) की पढाई अनिवार्य है।

41. संविधान के भाग 4 में वर्णित राज्य के निति निदेशक तत्ववके अंतर्गत शिक्षा के सार्वभौमीकरण की व्यवस्था की गयी है।

42.  अनुच्छेद 51क के अनुसार माता पिता का यह कर्त्तव्य है कि वे अपने बच्चों के लिए शिक्षा का अवसर प्रदान करें।

43.  1 अप्रैल 2010 से निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (जम्मू कश्मीर को छोड़कर) पुरे भारत में लागु हो गया है।

44. संविधान में लोकतंत्र,सामाजिक न्याय,धर्मनिरपेक्षता,भागीदारी,समानता आदि निहित मूल्य हैं।


45. निःशक्त व्यक्ति(सामान अवसर,अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम 1995 में लागु हुआ।


46. निशक्तता से अभिप्राय अंधता, कम दृष्टि, कुष्ट रोग , श्रवण शक्ति का ह्रास, चलन निशक्तता, मानसिक रुग्णता से है।

47. 1993 में बनी शिक्षा बिना बोझ की रिपोर्ट के आधार पर पाठ्यचर्या की समीक्षा उपरांत राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूप रेखा 2005 अस्तित्व में आई।

48. शिक्षक अपना दायित्व सही ढंग से पूर्ण कर सकें, इसके लिए जनगणना,आपदा राहत कार्य,चुनाव के अतिरिक्त उन्हें किसी गैर शैक्षणिक कार्य में नहीं लगाया जायेगा-rte 2009 के अनुसार।

49. राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद्(NCTE) की स्थापना 1995 में की गयी। इसका मुख्यालय नयी दिल्ली में है।

50. शिक्षक आचार संहिता में शिक्षक को क्या करना है,कैसे करना है,और क्या नहीं करना है का निर्देश दिया जाता है।

51. पाठ्यचर्या बालकेंद्रित शैक्षिक संकल्पना को मूर्त रूप देने का सबसे सशक्त माध्यम है।

52. राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा 2005 में अस्तित्व में आई जिसमे पाठ्यचर्या निर्माण के मार्गदर्शक शिद्धान्तों का उल्लेख किया गया है।
53. ncf2005 में चार पाठ्यचर्या क्षेत्रों की तरफ ध्यान आकर्षित किया गया है। काम,कला व् पारंपरिक दस्तकारियां,स्वस्थ्य व् शारीरिक शिक्षा, व् शांति बी

54. ncf 2005 अध्याय 1 "परिप्रेक्ष्य" शिक्षा की गुणवत्ता,बच्चों को क्या और कैसे पद्य जाये की व्याख्या करता है।

55.  ncf 2005 अध्याय 2"सीखना और ज्ञान" में ज्ञान की प्रकृति और बच्चों में सीखने की क्षमता पर चर्चा की गयी है।

56. ncf 2005 अध्याय 3 "पाठ्यचर्या क्षेत्र,स्कूल की अवश्थायें और आंकलन" में पाठ्यचर्या के विभिन्न क्षेत्रों हेतु दिए गए सुझावों के सैद्धांतिक आधारों का निरूपण किया गया है।

57. ncf 2005 अध्याय  "विद्यालय एवं कक्षा का वातावरण"
में वातावरण के भौतिक एवं मनोवैज्ञानिक आयामो का परीक्षण करते हुए यह प्रस्तुत किया गया है कि बच्चों के अधिगम को विद्यालय एवं कक्षा का वातावरण किस प्रकार प्रभावित करते हैं।

58. ncf 2005 अध्याय 5 " व्यवस्थागत सुधार" में चर्चा की गयी है कि स्कूली व्यवस्था में किस प्रकार के व्यापक व्यवस्थागत सुधारों की जरुरत होगी ताकि बच्चा कक्षा के अनुभव से ज्ञान का सृजन कर सके।

59. ncf 2005 में शांति के लिए शिक्षा पर बाल दिया गया है।

60. ncf 2005 में "सपनो के भारत को धरातल पर उतारने की युक्ति" के बारे में बताया गया है।

61.  ज्ञान- सृजन व् अनुभव  का विषय है जिससे बच्चा करके सीखता है और ज्ञान निर्माण की इस प्रक्रिया को संरचनावाद कहा जाता है।

प्रथम मोड्यूल समाप्त


62. बालमनोविज्ञान बच्चों के विकास की विभिन्न अवस्थाओं का अध्ययन कर शिक्षक को यह बताता है की कब और किस अवस्था में बच्चों को क्या और कैसे सिखाएं।

63. बालमनोविज्ञान बच्चे के जन्म से किशोरावस्था तक के विकास का अध्ययन करता है।

64. बाल विकास की तीन मुख्य अवस्थाएं हैं
A.शैशवावस्था-जन्म से 5 वर्ष तक
B.बाल्यावस्था-6 से 12 वर्ष तक
C.किशोरावस्था-13 से 18 वर्ष तक।

65. शैशवावस्था में बच्चों के भावी जीवन का निर्माण होता है।

66. आत्माभिव्यक्ति का सबसे उत्तम् साधन मातृभाषा है।

67. बालक की औपचारिक या विद्यालयी शिक्षा का आरम्भ बाल्यावस्था में होता है।

68.  शैक्षिक दृष्टि से बाल्यावस्था जीवन की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था है।

69. शिशु के स्वाभाविक विकास के लिए शिक्षा देते समय व्यक्तिगत विभिन्नता पर विशेष ध्यान देना जाता है।

70. बाल्यावस्था में विकास की गति में स्पस्टता व् स्थिरता आ जाती है।

Wednesday, 12 August 2015

Hindi samas

[8/9/2015, 11:44 AM] +91 74992 31123: समास – परिभाषा व प्रकार 10 मिनट में याद करें
5 Replies
समास
परिभाषा:
‘समास’ शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है ‘छोटा-रूप’। अतः जब दो या
दो से अधिक
शब्द
(पद) अपने बीच की विभक्तियों का लोप कर
जो छोटा रूप बनाते
हैं, उसे समास,
सामासिक
शब्द या समस्त पद कहते हैं। जैसे ‘रसोई के लिए घर’ शब्दों में से
‘के लिए’ विभक्ति का लोप
करने पर नया शब्द बना ‘रसोई घर’, जो एक सामासिक शब्द है।
किसी समस्त पद या सामासिक शब्द को उसके विभिन्न पदों
एवं विभक्ति सहित पृथक् करने
की क्रिया को समास का विग्रह कहते हैं जैसे विद्यालय
विद्या के लिए आलय, माता-पिता=माता
और पिता।
प्रकार:
समास छः प्रकार के होते हैं-
1. अव्ययीभाव समास,
2. तत्पुरुष समास
3. द्वन्द्व समास 4.
बहुब्रीहि समास
5. द्विगु समास 5. कर्म धारय समास
1.
अव्ययीभाव समास:
अव्ययीभाव समास में प्रायः
(i)पहला पद प्रधान होता है।
(ii) पहला पद या पूरा पद अव्यय होता है।
(वे शब्द जो लिंग, वचन, कारक,
काल के
अनुसार नहीं बदलते, उन्हें अव्यय कहते हैं)
(iii)यदि एक शब्द की पुनरावृत्ति हो और
दोनों शब्द मिलकर अव्यय की तरह प्रयुक्त
हो, वहाँ भी अव्ययीभाव समास होता है।
(iv) संस्कृत के उपसर्ग युक्त पद भी
अव्ययीभव समास होते हैं-
यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार।
यथाशीघ्र = जितना शीघ्र हो
यथाक्रम = क्रम के अनुसार
यथाविधि = विधि के अनुसार
यथावसर = अवसर के अनुसार
यथेच्छा = इच्छा के अनुसार
प्रतिदिन = प्रत्येक दिन। दिन-दिन। हर दिन
प्रत्येक = हर एक। एक-एक। प्रति एक
प्रत्यक्ष = अक्षि के आगे
घर-घर = प्रत्येक घर। हर घर। किसी भी
घर को न छोड़कर
हाथों-हाथ = एक हाथ से दूसरे हाथ तक। हाथ ही
हाथ में
रातों-रात = रात ही रात में
बीचों-बीच = ठीक
बीच में
साफ-साफ = साफ के बाद साफ। बिल्कुल साफ
आमरण = मरने तक। मरणपर्यन्त
आसमुद्र = समुद्रपर्यन्त
भरपेट = पेट भरकर
अनुकूल = जैसा कूल है वैसा
यावज्जीवन = जीवनपर्यन्त
निर्विवाद = बिना विवाद के
दर असल = असल में
बाकायदा = कायदे के अनुसार
2.
तत्पुरुष समास:
(i)तत्पुरुष समास में दूसरा पद (पर पद)
प्रधान होता है अर्थात् विभक्ति का लिंग, वचन
दूसरे पद के अनुसार होता है।
(ii) इसका विग्रह करने पर कत्र्ता व सम्बोधन
की विभक्तियों (ने, हे, ओ,
अरे) के अतिरिक्त
किसी भी कारक की विभक्ति
प्रयुक्त होती है तथा विभक्तियों
के अनुसार ही इसके उपभेद होते
हैं।
जैसे –
(क) कर्म तत्पुरुष (को)
कृष्णार्पण = कृष्ण को अर्पण
नेत्र सुखद = नेत्रों को सुखद
वन-गमन = वन को गमन
जेब कतरा = जेब को कतरने वाला
प्राप्तोदक = उदक को प्राप्त
(ख) करण तत्पुरुष (से/के द्वारा)
ईश्वर-प्रदत्त = ईश्वर से प्रदत्त
हस्त-लिखित = हस्त (हाथ) से लिखित
तुलसीकृत = तुलसी द्वारा रचित
दयार्द्र = दया से आर्द्र
रत्न जडि़त = रत्नों से जडि़त
(ग) सम्प्रदान तत्पुरुष (के लिए)
हवन-सामग्री = हवन के लिए सामग्री
विद्यालय = विद्या के लिए आलय
गुरु-दक्षिणा = गुरु के लिए दक्षिणा
बलि-पशु = बलि के लिए पशु
(घ) अपादान तत्पुरुष (से पृथक्)
ऋण-मुक्त = ऋण से मुक्त
पदच्युत = पद से च्युत
मार्ग भ्रष्ट = मार्ग से भ्रष्ट
धर्म-विमुख = धर्म से विमुख
देश-निकाला = देश से निकाला
(च) सम्बन्ध तत्पुरुष (का, के, की)
मन्त्रि-परिषद् = मन्त्रियों की परिषद्
प्रेम-सागर = प्रेम का सागर
राजमाता = राजा की माता
अमचूर =आम का चूर्ण
रामचरित = राम का चरित
(छ) अधिकरण तत्पुरुष (में, पे, पर)
वनवास = वन में वास
जीवदया = जीवों पर दया
ध्यान-मग्न = ध्यान में मग्न
घुड़सवार = घोड़े पर सवार
घृतान्न = घी में पक्का अन्न
कवि पुंगव = कवियों में श्रेष्ठ
3. द्वन्द्व समास
(i)द्वन्द्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं।
(ii) दोनों पद प्रायः एक दूसरे के विलोम होते हैं, सदैव
नहीं।
(iii)इसका विग्रह करने पर ‘और’, अथवा ‘या’ का प्रयोग होता है।
माता-पिता = माता और पिता
दाल-रोटी = दाल और रोटी
पाप-पुण्य = पाप या पुण्य/पाप और पुण्य
अन्न-जल = अन्न और जल
जलवायु = जल और वायु
फल-फूल = फल और फूल
भला-बुरा = भला या बुरा
रुपया-पैसा = रुपया और पैसा
अपना-पराया = अपना या पराया
नील-लोहित = नीला और लोहित (लाल)
धर्माधर्म = धर्म या अधर्म
सुरासुर = सुर या असुर/सुर और असुर
शीतोष्ण = शीत या उष्ण
यशापयश = यश या अपयश
शीतातप = शीत या आतप
शस्त्रास्त्र = शस्त्र और अस्त्र
कृष्णार्जुन = कृष्ण और अर्जुन
4. बहुब्रीहि समास
(i)बहुब्रीहि समास में कोई भी पद प्रधान
नहीं होता।
(ii) इसमें प्रयुक्त पदों के सामान्य अर्थ की अपेक्षा
अन्य अर्थ
की प्रधानता रहती है।
(iii)इसका विग्रह करने पर ‘वाला, है, जो, जिसका,
जिसकी, जिसके, वह आदि
आते हैं।
गजानन = गज का आनन है जिसका वह (गणेश)
त्रिनेत्र = तीन नेत्र हैं जिसके वह (शिव)
चतुर्भुज = चार भुजाएँ हैं जिसकी वह (विष्णु)
षडानन = षट् (छः) आनन हैं जिसके वह (कार्तिकेय)
दशानन = दश आनन हैं जिसके वह (रावण)
घनश्याम = घन जैसा श्याम है जो वह (कृष्ण)
पीताम्बर = पीत अम्बर हैं जिसके वह
(विष्णु)
चन्द्रचूड़ = चन्द्र चूड़ पर है जिसके वह
गिरिधर = गिरि को धारण करने वाला है जो वह
मुरारि = मुर का अरि है जो वह
आशुतोष = आशु (शीघ्र) प्रसन्न होता है जो वह
नीललोहित = नीला है लहू जिसका वह
वज्रपाणि = वज्र है पाणि में जिसके वह
सुग्रीव = सुन्दर है ग्रीवा
जिसकी वह
मधुसूदन = मधु को मारने वाला है जो वह
आजानुबाहु = जानुओं (घुटनों) तक बाहुएँ हैं जिसकी
वह
नीलकण्ठ = नीला कण्ठ है जिसका वह
महादेव = देवताओं में महान् है जो वह
मयूरवाहन = मयूर है वाहन जिसका वह
कमलनयन = कमल के समान नयन हैं जिसके वह
कनकटा = कटे हुए कान है जिसके वह
जलज = जल में जन्मने वाला है जो वह (कमल)
वाल्मीकि = वल्मीक से उत्पन्न है जो वह
दिगम्बर = दिशाएँ ही हैं जिसका अम्बर ऐसा वह
कुशाग्रबुद्धि = कुश के अग्रभाग के समान बुद्धि है
जिसकी
वह
मन्द बुद्धि = मन्द है बुद्धि जिसकी वह
जितेन्द्रिय = जीत ली हैं इन्द्रियाँ जिसने
वह
चन्द्रमुखी = चन्द्रमा के समान मुखवाली
है जो वह
अष्टाध्यायी = अष्ट अध्यायों की पुस्तक
है जो वह
5. द्विगु समास
(i)द्विगु समास में प्रायः पूर्वपद संख्यावाचक होता है तो
कभी-कभी
परपद भी संख्यावाचक
देखा जा सकता है।
(ii) द्विगु समास में प्रयुक्त संख्या किसी समूह का बोध
कराती है
अन्य अर्थ का नहीं, जैसा
कि बहुब्रीहि समास में देखा है।
(iii)इसका विग्रह करने पर ‘समूह’ या ‘समाहार’ शब्द प्रयुक्त
होता है।
दोराहा = दो राहों का समाहार
पक्षद्वय = दो पक्षों का समूह
सम्पादक द्वय = दो सम्पादकों का समूह
त्रिभुज = तीन भुजाओं का समाहार
त्रिलोक या त्रिलोकी = तीन लोकों का समाहार
त्रिरत्न = तीन रत्नों का समूह
संकलन-त्रय = तीन का समाहार
भुवन-त्रय = तीन भुवनों का समाहार
चैमासा/चतुर्मास = चार मासों का समाहार
चतुर्भुज = चार भुजाओं का समाहार (रेखीय आकृति)
चतुर्वर्ण = चार वर्णों का समाहार
पंचामृत = पाँच अमृतों का समाहार
पं चपात्र = पाँच पात्रों का समाहार
पंचवटी = पाँच वटों का समाहार
षड्भुज = षट् (छः) भुजाओं का समाहार
सप्ताह = सप्त अहों (सात दिनों) का समाहार
सतसई = सात सौ का समाहार
सप्तशती = सप्त शतकों का समाहार
सप्तर्षि = सात ऋषियों का समूह
अष्ट-सिद्धि = आठ सिद्धियों का समाहार
नवरत्न = नौ रत्नों का समूह
नवरात्र = नौ रात्रियों का समाहार
दशक = दश का समाहार
शतक = सौ का समाहार
शताब्दी = शत (सौ) अब्दों (वर्षों) का समाहार
6. कर्मधारय समास
(i)कर्मधारय समास में एक पद विशेषण होता है तो दूसरा पद
विशेष्य।
(ii) इसमें कहीं कहीं उपमेय उपमान का
सम्बन्ध होता है तथा विग्रह
करने पर ‘रूपी’
शब्द प्रयुक्त होता है –
पुरुषोत्तम = पुरुष जो उत्तम
नीलकमल = नीला जो कमल
महापुरुष = महान् है जो पुरुष
घन-श्याम = घन जैसा श्याम
पीताम्बर = पीत है जो अम्बर
महर्षि = महान् है जो ऋषि
नराधम = अधम है जो नर
अधमरा = आधा है जो मरा
रक्ताम्बर = रक्त के रंग का (लाल) जो अम्बर
कुमति = कुत्सित जो मति
कुपुत्र = कुत्सित जो पुत्र
दुष्कर्म = दूषित है जो कर्म
चरम-सीमा = चरम है जो सीमा
लाल-मिर्च = लाल है जो मिर्च
कृष्ण-पक्ष = कृष्ण (काला) है जो पक्ष
मन्द-बुद्धि = मन्द जो बुद्धि
शुभागमन = शुभ है जो आगमन
नीलोत्पल = नीला है जो उत्पल
मृग नयन = मृग के समान नयन
चन्द्र मुख = चन्द्र जैसा मुख
राजर्षि = जो राजा भी है और ऋषि भी
नरसिंह = जो नर भी है और सिंह भी
मुख-चन्द्र = मुख रूपी चन्द्रमा
वचनामृत = वचनरूपी अमृत
भव-सागर = भव रूपी सागर
चरण-कमल = चरण रूपी कमल
क्रोधाग्नि = क्रोध रूपी अग्नि
चरणारविन्द = चरण रूपी अरविन्द
विद्या-धन = विद्यारूपी धन

Tuesday, 11 August 2015

education history

1835. मैकाले मिनट्स
1854. वुड्स डिस्पैच
1882. हंटर आयोग
1901. शिमला शिक्षा सम्मेलन
1902. रैले कमीशन
1904. विश्वविद्यालय अधिनियम
1911. गोखले विधेयक
1893 में सर्वप्रथम सियाजीराव गायकवाड़ ने अपने राज्य बड़ौदा मे अनिवार्य एवं निशुल्क शिक्षा लागू किया।
1917 सैडलर कमीशन ने पी०जी० कोर्स चलाने का सुझाव दिया।
1929हार्टोंग कमीशन ने प्राथमिक शिक्षा में अपव्यय एवं अवरोधन की समस्या उजागर की
1937 वर्धा योजना नागपुर मुम्ब ई वर्तमान मे गांधी जी का प्लान कक्षा 1-8 तक निशुल्क शिक्षा 7-14वर्ष तक प्राथमिक एवं उच्च प्रा० शिक्षा प्राथमिक में सहशिक्षा एवं उच्च प्रा० में बालक बालिका अलग-अलग शिक्षा देने का प्लान
1937वुड एबट रिपोर्ट में तकनीकि शिक्षा भारत में देने का प्रस्ताव मगर द्वितीय विश्व युद्ध के कारण बिलम्ब रहा युद्ध समाप्ति के बाद Aicte. का गठन
1939 में नई तालीम समिति का गठन बेसिक शिक्षा हेतु अध्यक्ष जाकिर हुसेन जी रहे।
1944सार्जेन्ट कमीशन अंग्रेजी काल का अंतिम कमीशन यू डी सी के गठन का सुझाव university development commission
और पूर्व प्राथमिक शिक्षा शुरु की जाये।
फ्राबेल ने प्रथम बार पूर्व प्राथमिक शिक्षा की अवधारणा प्रस्तुत की.

Monday, 10 August 2015

education

 JITENDRA GOYAL: 1. Mid Day Meal – 15 August, 1995
2. Education For All – 1990
3. Operation Black Board – 1987-88
4. Sarva Shiksha Abhiyan – 2000-01
5. National Literacy Mission – 5 May, 1988
6. National Council of Education Research and Training
– 1
September, 1961
7. First Open University in India – Andhra Pradesh Open
University in 1982 (now renamed as Dr. B. R. Ambedkar
Open University).
8. Number of Open Universities in India – 14 (1 National
and
13 State Open Universities)
9. First Open University in World – United Kingdom (U.
K) in
1969
10. International Education Commission – 1996
11. Indra Gandhi National Open University – 15
September,
1985
12. All India Council for Technical Education –
Established
in November, 1945 first as an advisory body and later
on
in
1987 given statutory status by an Act of Parliament.
13. National Education Day – It is celebrated on 11
November every year in the memory of India’s First
Union
Minister of Education, Dr. Maulana Abul Kalam Azad
14. Central Advisory Board of Education – Established in
1920 as an advisory body of the Government but it was
abolished in 1923. In 1935, it was again revived.
15. Kothari Commission (1964-66) –The commission
started its work on October, 1964 and submitted its
report
on 29 June, 1966. The commission setup follows 12
task
forces and 7 working groups.
16. Central Institute of Educational Technology – 1984
17. District Primary Education Programme –1997
18. Educational Media Research Centre – 1983
19. Educational Research and Innovation Committee –
1974
20. National Assessment and Accreditation – 1992
21. National Adult Education Programme – 2 October,
1978
22. National Council of Teacher Education – 1973,
autonomous status 1993
23. Rehabilitation Council of India Act – 1992, amended
on
2000
24. Regional college of Education – 1984
25. Wechsler Adult Education Scale – 1955
26. Wechsler Children Education Scale – 1949
27. Right To Information – October, 2005.
28. International Literacy Day proclaimed by UNESCO –
8
September
29. Indian coastal areas experienced Tsunami disaster

2004
30. Programme of Action – 1992.
NAAC AUR DPEP WRONG H
: DPEP- 1994
NAAC- 1994

Sunday, 9 August 2015

phycology

शिक्षा मनोविज्ञान का खजाना (महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर )1. Psychology शब्द का सबसे पहले प्रयोग किया– रुडोल्फ गॉलकाय द्वारा 1590 में2. Psychology की प्रथम पुस्तक Psychologiaलिखी - रुडोल्फ गॉलकाय ने3. Psychology शब्द की उत्पत्ति हुई है – Psyche+Logos यूनानी भाषा के दो शब्दों से4. विश्व की प्रथम Psychology Lab – 1879 मेंविलियम वुंट द्वारा जर्मनी में स्थापित5. विश्व का प्रथम बुद्धि परीक्षण – 1905 मेंबिने व साइमन द्वारा* भारत का प्रथम बुद्धि परीक्षण – 1922 में सी.एच. राईस द्वारा6. आधुनिक मनोविज्ञान का जनक – विलियमजेम्स7. आधुनिक मनोविज्ञान के प्रथममनोवैज्ञानिक – डेकार्टे8. किन्डरगार्टन विधि के प्रतिपादक – फ्रोबेल9. डाल्टन विधि के प्रतिपादक – मिस हेलेनपार्कहर्स्ट10. मांटेसरी विधि के प्रतिपादक – मैडममारिया मांटेसरी11. संज्ञानात्मक आन्दोलन के जनक – अल्बर्टबांडूरा12. मनोविज्ञान के विभिन्न सिद्धांत/संप्रदाय और उनके जनक –•गेस्टाल्टवाद (1912) – कोहलर, कोफ्का,वर्दीमर व लेविन•संरचनावाद (1879)– विलियम वुंट•व्यवहारवाद (1912) – जे. बी. वाटसन•मनोविश्लेशणवाद (1900) – सिगमंड फ्रायड•विकासात्मक/संज्ञानात्मक – जीन पियाजे•संरचनात्मक अधिगम की अवधारणा – जेरोमब्रूनर•सामाजिक अधिगम सिद्धांत (1986) – अल्बर्टबांडूरा•संबंधवाद (1913) – थार्नडाईक•अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत (1904) –पावलव•क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत (1938) – स्किनर•प्रबलन/पुनर्बलन सिद्धांत (1915) – हल•अन्तर्दृष्टि/सूझ सिद्धांत (1912) - कोहलर13. व्यक्तितत्व मापन की प्रमुख प्रक्षेपीविधियाँ•प्रासंगिक अंतर्बोध परीक्षण (T.A.T.)•बाल अंतर्बोध परीक्षण (C.A.T.)•स्याही धब्बा परीक्षण (I.B.T.)•वाक्य पूर्ति परीक्षण (S.C.T.)14. व्यक्तितत्व मापन की प्रमुख अप्रक्षेपीविधियाँ•अनुसूची•प्रश्नावली•साक्षात्कार•आत्मकथा विधि•व्यक्ति इतिहास विधि•निरीक्षण•समाजमिति•शारीरिक परीक्षण•स्वप्न विश्लेषण•मानदंड मूल्यांकन विधि•स्वंतत्र साहचर्य परीक्षण (F.W.A.T.)15. बुद्धि के सिद्धांत और उनके प्रतिपादक –•एक खण्ड का /निरंकुशवादी सिद्धांत (1911) –बिने, टरमन व स्टर्न•द्वि खण्ड का सिद्धांत (1904) – स्पीयरमैन•तीन खण्ड का सिद्धांत – स्पीयरमैन•बहु खण्ड का सिद्धांत – थार्नडाईक•समूह कारक सिद्धांत – थर्स्टन व कैली=> मनोविज्ञान के जनक = विलियम जेम्स=> आधुनिक मनोविज्ञान के जनक = विलियमजेम्स=> प्रकार्यवाद साम्प्रदाय के जनक = विलियमजेम्स=> आत्म सम्प्रत्यय की अवधारणा = विलियमजेम्स=> शिक्षा मनोविज्ञान के जनक = थार्नडाइक=> प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत = थार्नडाइक=> प्रयत्न एवं भूल का सिद्धांत = थार्नडाइक=> संयोजनवाद का सिद्धांत = थार्नडाइक=> उद्दीपन-अनुक्रिया का सिद्धांत =थार्नडाइक=> S-R थ्योरी के जन्मदाता = थार्नडाइक=> अधिगम का बन्ध सिद्धांत = थार्नडाइक=> संबंधवाद का सिद्धांत = थार्नडाइक=> प्रशिक्षण अंतरण का सर्वसम अवयव कासिद्धांत = थार्नडाइक=> बहु खंड बुद्धि का सिद्धांत = थार्नडाइक=> बिने-साइमन बुद्धि परीक्षण के प्रतिपादक =बिने एवं साइमन=> बुद्धि परीक्षणों के जन्मदाता = बिने=> एक खंड बुद्धि का सिद्धांत = बिने=> दो खंड बुद्धि का सिद्धांत = स्पीयरमैन=> तीन खंड बुद्धि का सिद्धांत = स्पीयरमैन=> सामान्य व विशिष्ट तत्वों के सिद्धांत केप्रतिपादक = स्पीयरमैन=> बुद्धि का द्वय शक्ति का सिद्धांत =स्पीयरमैन=> त्रि-आयाम बुद्धि का सिद्धांत =गिलफोर्ड=> बुद्धि संरचना का सिद्धांत = गिलफोर्ड=> समूह खंड बुद्धि का सिद्धांत = थर्स्टन=> युग्म तुलनात्मक निर्णय विधि के प्रतिपादक= थर्स्टन=> क्रमबद्ध अंतराल विधि के प्रतिपादक =थर्स्टन=> समदृष्टि अन्तर विधि के प्रतिपादक = थर्स्टनव चेव=> न्यादर्श या प्रतिदर्श(वर्ग घटक) बुद्धि कासिद्धांत = थॉमसन=> पदानुक्रमिक(क्रमिक महत्व) बुद्धि कासिद्धांत = बर्ट एवं वर्नन=> तरल-ठोस बुद्धि का सिद्धांत = आर. बी.केटल=> प्रतिकारक (विशेषक) सिद्धांत केप्रतिपादक = आर. बी. केटल=> बुद्धि 'क' और बुद्धि 'ख' का सिद्धांत = हैब=> बुद्धि इकाई का सिद्धांत = स्टर्न एवं जॉनसन=> बुद्धि लब्धि ज्ञात करने के सुत्र के प्रतिपादक= विलियम स्टर्न=> संरचनावाद साम्प्रदाय के जनक = विलियमवुण्ट=> प्रयोगात्मक मनोविज्ञान के जनक =विलियम वुण्ट=> विकासात्मक मनोविज्ञान के प्रतिपादक =जीन पियाजे=> संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत = जीनपियाजे=> मूलप्रवृत्तियों के सिद्धांत के जन्मदाता =विलियम मैक्डूगल=> हार्मिक का सिध्दान्त = विलियम मैक्डूगल=> मनोविज्ञान को मन मस्तिष्क का विज्ञान= पोंपोलॉजी=> क्रिया प्रसूत अनुबंधन का सिध्दान्त =स्किनर=> सक्रिय अनुबंधन का सिध्दान्त = स्किनर=> अनुकूलित अनुक्रिया का सिद्धांत = इवानपेट्रोविच पावलव=> संबंध प्रत्यावर्तन का सिद्धांत = इवानपेट्रोविच पावलव=> शास्त्रीय अनुबंधन का सिद्धांत = इवानपेट्रोविच पावलव=> प्रतिस्थापक का सिद्धांत= इवान पेट्रोविच पावलव=> प्रबलन(पुनर्बलन) का सिद्धांत = सी. एल. हल=> व्यवस्थित व्यवहार का सिद्धांत = सी. एल.हल=> सबलीकरण का सिद्धांत = सी. एल. हल=> संपोषक का सिद्धांत = सी. एल. हल=> चालक / अंतर्नोद(प्रणोद) का सिद्धांत =सी. एल. हल=> अधिगम का सूक्ष्म सिद्धान्त = कोहलर=> सूझ या अन्तर्दृष्टि का सिद्धांत = कोहलर,वर्दीमर, कोफ्का=> गेस्टाल्टवाद सम्प्रदाय के जनक = कोहलर,वर्दीमर, कोफ्का=> क्षेत्रीय सिद्धांत = लेविन=> तलरूप का सिद्धांत = लेविन=> समूह गतिशीलता सम्प्रत्यय के प्रतिपादक =लेविन=> सामीप्य संबंधवाद का सिद्धांत = गुथरी=> साईन(चिह्न) का सिद्धांत = टॉलमैन=> सम्भावना सिद्धांत के प्रतिपादक = टॉलमैन=> अग्रिम संगठक प्रतिमान के प्रतिपादक =डेविड आसुबेल=> भाषायी सापेक्षता प्राक्कल्पना केप्रतिपादक = व्हार्फ=> मनोविज्ञान के व्यवहारवादी सम्प्रदाय के

Monday, 3 August 2015

psychology



1. Psychology शब्द का सबसे पहले प्रयोग किया – रुडोल्फ गॉलकाय द्वारा 1590 में
2. Psychologyकी प्रथम पुस्तक Psychologia लिखी - रुडोल्फ गॉलकाय ने
3. Psychologyशब्द की उत्पत्ति हुई है – Psyche+Logos यूनानी भाषा के दो शब्दों से
4.विश्व की प्रथम Psychology Lab – 1879 में विलियम वुंट द्वारा जर्मनी में स्थापित
5.विश्व का प्रथम बुद्धि परीक्षण – 1905 में बिने व साइमन द्वारा
*भारत का प्रथम बुद्धि परीक्षण – 1922 में सी. एच. राईस द्वारा
6.आधुनिक मनोविज्ञान का जनक – विलियम जेम्स
7.आधुनिक मनोविज्ञान के प्रथम मनोवैज्ञानिक – डेकार्टे
8.किन्डरगार्टन विधि के प्रतिपादक – फ्रोबेल
9.डाल्टन विधि के प्रतिपादक – मिस हेलेन पार्कहर्स्ट
10.मांटेसरी विधि के प्रतिपादक – मैडम मारिया मांटेसरी
11.संज्ञानात्मक आन्दोलन के जनक – अल्बर्ट बांडूरा


12. मनोविज्ञान के विभिन्न सिद्धांत/संप्रदाय और उनके जनक –
गेस्टाल्टवाद (1912) – कोहलर, कोफ्का, वर्दीमर व लेविन
संरचनावाद (1879)– विलियम वुंट
व्यवहारवाद (1912) – जे. बी. वाटसन
मनोविश्लेशणवाद (1900) – सिगमंड फ्रायड
विकासात्मक/संज्ञानात्मक – जीन पियाजे
संरचनात्मक अधिगम की अवधारणा – जेरोम ब्रूनर
सामाजिक अधिगम सिद्धांत (1986) – अल्बर्ट बांडूरा
संबंधवाद (1913) – थार्नडाईक
अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत (1904) – पावलव
क्रियाप्रसूत अनुबंधन सिद्धांत (1938) – स्किनर
प्रबलन/पुनर्बलन सिद्धांत (1915) – हल
अन्तर्दृष्टि/सूझ सिद्धांत (1912) - कोहलर
13.व्यक्तितत्व मापन की प्रमुख प्रक्षेपी विधियाँ
प्रासंगिक अंतर्बोध परीक्षण (T.A.T.)
बाल अंतर्बोध परीक्षण (C.A.T.)
स्याही धब्बा परीक्षण (I.B.T.)
वाक्य पूर्ति परीक्षण (S.C.T.)
14.व्यक्तितत्व मापन की प्रमुख अप्रक्षेपी विधियाँ
अनुसूची
प्रश्नावली
साक्षात्कार
आत्मकथा विधि
व्यक्ति इतिहास विधि
निरीक्षण
समाजमिति
शारीरिक परीक्षण
स्वप्न विश्लेषण
मानदंड मूल्यांकन विधि
स्वंतत्र साहचर्य परीक्षण (F.W.A.T.)
15.बुद्धि के सिद्धांत और उनके प्रतिपादक –
एक खण्ड का /निरंकुशवादी सिद्धांत (1911) – बिने, टरमन व स्टर्न
द्वि खण्ड का सिद्धांत (1904) – स्पीयरमैन
तीन खण्ड का सिद्धांत – स्पीयरमैन
बहु खण्ड का सिद्धांत – थार्नडाईक
समूह कारक सिद्धांत – थर्स्टन व कैली

16. बुद्धि लब्धि (I.Q.) ज्ञात करने का सूत्र –
बुद्धि लब्धि (I.Q.) = मानसिक आयु (M.A.)/वास्तविक आयु (C.A.)×100
17.बुद्धि लब्धि (I.Q.) ज्ञात करने के सूत्र का प्रतिपादक – विलियम स्टर्न (1912)
18.बुद्धि लब्धि (I.Q.) ज्ञात करने के सूत्र का सर्वप्रथम प्रयोग – (1916)
19.बुद्धि लब्धि (Intelligent Quotient) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग – टरमन
20.मानसिक आयु (Mental Age) शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग – बिने (1908)
21.वैयक्तिक भाषात्मक बुद्धि परीक्षण/परीक्षाएँ –
बिने-साइमन बुद्धि परीक्षण – बिने & थियोडर साइमन (1905,1908,1911)
स्टेनफोर्ड-बिने स्केल – स्टेनफोर्ड वि.वि. में बिने द्वारा (1916,1937,1960)
22.वैयक्तिक क्रियात्मक बुद्धि परीक्षण/परीक्षाएँ –
पोर्टियस भूल-भूलैया परीक्षण – एस. डी. पोर्टियस (1924)
वैश्लर-वैल्यूब बुद्धि परीक्षण – डी. वैश्लवर (1944,1955)
23.सामूहिक भाषात्मक बुद्धि परीक्षण/परीक्षाएँ –
आर्मी अल्फ़ा परीक्षण – आर्थर एस. ओटिस (1917)
सेना सामान्य वर्गीकरण (A.G.C.T.) - (1945)
24.सामूहिक क्रियात्मक बुद्धि परीक्षण/परीक्षाएँ –
आर्मी बीटा परीक्षण - आर्थर एस. ओटिस (1919)
शिकागो क्रियात्मक बुद्धि परीक्षण – 6 वर्ष से वयस्कों की बुद्धि का मापन
25. ‘हिन्दुस्तानी क्रिया परीक्षण’ - (1922) सी. एच. राईस